संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)
Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंओ३म् नमो नमः सर्वविधात्रे जगदीश्वराय। अथ संस्कारविधिं वक्ष्यामः ओं स॒ह ना॑ववतु। स॒ह नौ॑ भुनक्तु। स॒ह वी॒र्यं॑ करवावहै। ते॒ज॒स्विना॒वधी॑तमस्तु॒। मा वि॑द्विषा॒वहै॑। ओं शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥ —तैत्तिरीयआरण्यके, अष्टमप्रपाठके, प्रथमानुवाके सर्वात्मा सच्चिदानन्दो विश्वादिविश्वकृद्विभुः। भूयात्तमां सहायो नस्सर्वेशो न्यायकृच्छुचिः॥ १॥ गर्भाद्या मृत्युपर्यन्ताः संस्काराः षोडशैव हि। वक्ष्यन्ते तं नमस्कृत्यानन्तविद्यं परेश्वरम्॥ २॥ वेदादिशास्त्रसिद्धान्तमाध्याय परमादरात्। आर्यैतिह्यं पुरस्कृत्य शरीरात्मविशुद्धये॥ ३॥ संस्कारैस्संस्कृतं यद्यन्मेध्यमत्र तदुच्यते। असंस्कृतं तु यल्लोके तदमेध्यं प्रकीर्त्यते॥ ४॥ अतः संस्कारकरणे क्रियतामुद्यमो बुधैः। शिक्षौषधिभिर्नित्यं सर्वथा सुखवर्द्धनः॥ ५॥