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संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

संस्कार विधि भारतीय संस्कृति में संस्कारों का विशेष महत्त्व है। संस्कार हमारे जीवन के आधार हैं। संस्कार का अर्थ होता है शुद्ध करना, साफ करना, चमकाना और भीतरी रूप को प्रकाशित करना। हमारी दिनचर्या की भांति हमारी जीवनचर्या भी नियमित है। जन्म से लेकर मृत्यूपर्यंत के मानव जीवन का गंभीर अध्ययन करके महर्षि दयानन्द ने मनुष्य के पूर्ण विकास के लिए- ऐसा विकास जिसमें शरीर, मन, आत्मा तीनों की उन्नति हो, जिन सुनहरे नियमों की रचना की है उन्हें हम अपनी जीवनचर्या के नियम कहते हैं। हमारे संस्कार भी इसी जीवनचर्या के प्रमुख अंग हैं। आइये महर्षि दयानन्द कृत संस्कार विधि द्वारा सोलह संस्कारों की पूर्ण विधि जानें। विजयकुमार गोविन्दराम हासानन्द