संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 125, कुल 302 में से
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सन्तति-शास्त्र ।
लिये लोग अच्छी खासी बच्चा जननेवाली स्त्रीको बन्ध्या बना देते हैं । इस विषयमें स्त्री और पुरुष दोनोंको विचार करनेकी आवश्यकता है, क्योंकि कहीं कहीं पुरुषोंके निकम्मेपनसे भी स्त्रियाँ ही बढनाम होती हैं । पुरुषों तक किसीका विचार भी नहीं जाता, क्योंकि वे तो पुरुष ही ठहरे ।
जहाँ तक देखा गया है गर्भ न रहनेके अनेक कारण होते हैं, जो स्त्री और पुरुष दोनोंमें पाए जाते हैं ।
( १ ) स्त्रियोंमें होनेवाले कारण ।
१. योनिके परदे का न फटना ।
१. यह वह परदा है कि जिसको ( Hymen ) कहते हैं । योनिद्वारके पीछेका भाग चलगमी किहारीसे अद्द चंद्राकार ढका होता है । कभी कभी यह पूर्ण चंद्राकारसे पूरे योनिद्वारको ढके रहता है । यों तो आम तौरसे यह मुलायम रहता है, परन्तु किसी किसीका चिमड़ा और कड़ा होता है । यह पुरुष प्रसंग होनेसे फट जाता है । इसीसे स्त्रीके क्षता अर्थात् पुरुषसे प्रसंग कर चुकने और अक्षता अर्थात् पुरुषसे प्रसंग न होनेकी पहचान होती है । जिन स्त्रियोंमें यह परदाचिमड़ा या कड़ा होता है, तो वह नहीं फटता । इसके कई कारण हैं ।
१. जब कि परदा बहुत कड़ा हो ।
२. जब कि परदा चिमड़ा और अत्यन्त मुलायम हो ।
३. जब कि परदे तक लिंगेन्द्रिय न पहुँचे ।
इन कारणोंसे जब परदा नहीं फटता और वीर्य वहाँतक पहुँच नहीं सकता, तो गर्भ धारण नहीं होता ।