भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

Devanagarihipublished302 पृष्ठ

पृष्ठ 129, कुल 302 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 129

१०८

सन्तति-शास्त्र ।

२. रोगोंसे किसी समयमें गर्भाशयको मुख छोटा होना, इससे भी वीर्य अंदर नहीं जा सकता ।

२ गर्भाशयकी सूजनसे ।

१. यह कई प्रकारकी होती है । जितने प्रकारकी सूजन है सबमें नीचे लिखी बातें होती हैं ।

१. रजका निगड़ जाना और समयपर न आना ।

२. गर्भाशयके आकारमें तबदीली ।

३. गर्भाशयके मुखका छोटा पड जाना ।

४. अनेक कारणोंसे कुछ गाढ़ा पानी निकला करना ।

इन कारणोंसे गर्भ नहीं रहता ।

३ गर्भाशयके फट जानेसे ।

१. यह रोग दो दशाओंमें होता है ।

१. जब कि बच्चा पैदा होनेका समय निकट हो ।

२. जब कि बच्चा पैदा होनेका समय हो ।

एक बार जहां गर्भाशय फट जाय, तो इसके बाद गर्भ नहीं रहता ।

४ गर्भाशयके फूल जानेसे ।

१. यह भयंकर रोग है । इसमें रज निगड़ जाता है । गर्भाशयमें तबदीली हो जाती है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

५. गर्भाशयके जुकामसे ।

१. इस रोगमें रज निगड़ता है और एक तरहका चिप-चिपा पदार्थ निकला करता है, इस कारण गर्भ नहीं रहता ।

६. गर्भाशयके मुखकी सूजनसे ।

१. इस रोगमें मुख छोटा पड जाता है और तनाव रहता