संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 129, कुल 302 में से
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सन्तति-शास्त्र ।
२. रोगोंसे किसी समयमें गर्भाशयको मुख छोटा होना, इससे भी वीर्य अंदर नहीं जा सकता ।
२ गर्भाशयकी सूजनसे ।
१. यह कई प्रकारकी होती है । जितने प्रकारकी सूजन है सबमें नीचे लिखी बातें होती हैं ।
१. रजका निगड़ जाना और समयपर न आना ।
२. गर्भाशयके आकारमें तबदीली ।
३. गर्भाशयके मुखका छोटा पड जाना ।
४. अनेक कारणोंसे कुछ गाढ़ा पानी निकला करना ।
इन कारणोंसे गर्भ नहीं रहता ।
३ गर्भाशयके फट जानेसे ।
१. यह रोग दो दशाओंमें होता है ।
१. जब कि बच्चा पैदा होनेका समय निकट हो ।
२. जब कि बच्चा पैदा होनेका समय हो ।
एक बार जहां गर्भाशय फट जाय, तो इसके बाद गर्भ नहीं रहता ।
४ गर्भाशयके फूल जानेसे ।
१. यह भयंकर रोग है । इसमें रज निगड़ जाता है । गर्भाशयमें तबदीली हो जाती है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
५. गर्भाशयके जुकामसे ।
१. इस रोगमें रज निगड़ता है और एक तरहका चिप-चिपा पदार्थ निकला करता है, इस कारण गर्भ नहीं रहता ।
६. गर्भाशयके मुखकी सूजनसे ।
१. इस रोगमें मुख छोटा पड जाता है और तनाव रहता