भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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गर्भ न रहने के कारण ।

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२०. गर्भाशयका मुख अधिक खुल जानेसे ।

१. इस रोगमें वीर्य अंदर पहुंचकर फिर निकल आता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

२१. गर्भाशयके मस्तीसे ।

१. ऐसे मस्ते गर्भाशयके अंदर होते हैं, अतएव विकार उत्पन्न होनेसे गर्भ नहीं रहता ।

२२. गर्भाशयके दग्ध हो जानेसे ।

१. थोड़ी अवस्थामें पुरुष-प्रसंग होनेसे गर्भाशय दग्ध होकर अनेक विकार उत्पन्न करता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

२३. गर्भाशयमें रक्त जमकर सूख जानेसे ।

१. गर्भाशयका मुख सकरा होनेके कारण रक्त जम जाता है, अतएव विकार उत्पन्न होनेसे गर्भ नहीं रहता ।

२४. गर्भाशयमें वीर्य न उठनेसे ।

१. गर्भाशयके अंदर चरबी बढ़ जानेसे चिकनाईके कारण वीर्य बाहर निकल आता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

२५. गर्भाशयमें मांस बढ़ जानेसे ।

१. इस रोगमें गर्भाशयके अंदर मांस घट्ट जाता है और बढ़बूदार रज निकलता है, अतएव इस विगाड़से गर्भ नहीं रहता ।

२६. गर्भाशयमें कीड़े पड़ जानेसे ।

१. इस रोगमें एक प्रकारके कीड़े गर्भाशयमें पड़ जाते हैं, और पतला बढ़बूदार स्तन हुआ करता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

६. रजोधर्मके अनेक रोगोंसे ।

(इस विषयमें इसी पुस्तकका 'रजोधर्मके रोग' नामक प्रकरण देखो) ।