संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 133, कुल 302 में से
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सन्तति-शास्त्र ।
१ रजोवर्मके न होनेसे ।
१. ऐसी दशामें रजका स्त्राव न होनेके कारण गर्भ नहीं रहता
२. रज कम निकलनेसे ।
१. ऐसी दशामें जब कि रज एक ही दिन निकलकर रह जाय और फिर न निकले, तो गर्भ अण्ड और गर्भाशय में विकार हो जाता है, अतएव संतान नहीं होती ।
३. कष्ट रजके प्रकोपसे ।
१. ऐसी दशामें गर्भाशय और गर्भ-अंडमें चिगाड़ उत्पन्न हो जाता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
४. अधिक रज निकलनेसे ।
१. ऐसी दशामें जब कि बराबर आठ आठ दस दस दिन तक रज निकला करे । इस रोगमें रगोंका मुख खुल जाता है, अतएव इस प्रकारके अनेक विकारोंसे गर्भ नहीं रहता ।
७. अनेक प्रकारके वन्ध्या रोगोंसे ।
(इस विषयमें इस पुस्तकका “वन्ध्या-रोग” प्रकरण देखो)
१ जन्म वन्ध्यासे ।
१. गर्भ उत्पन्न करनेवाले अवयवोंके न होनेसे इस रोगमें गर्भ रहता ही नहीं ।
२ काक वन्ध्यासे ।
१. एक बार बच्चा हो जानेपर गर्भाशय नष्ट हो जानेसे दूसरी बार गर्भ नहीं उद्भवता ।
३. रजोहीनासे ।
१. इस रोगमें गर्भ अंडके न होनेपर रज नहीं होता, अतएव गर्भ नहीं रहता ।