संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 134, कुल 302 में से
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४. मेठीसे ।
१. शरीरमें चरबी बढ़कर गर्भाशय नष्ट होनेसे गर्भ नहीं रहता ।
५. अतिसूलासे ।
१. अधिक मोटे होनेसे वीर्य गर्भाशयतक नहीं पहुंचता, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
६. नाटकोष्टीसे ।
१. इस रोग से गर्भाशय नष्ट हो जाता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
७. वृद्धकी से ।
१. इस रोग में निर्बलता के कारण गर्भ नहीं रहता ।
८. प्राकृतयोगिता से ।
१. छोटी अवस्था में रजोगर्भ के पहले पुरुष-संयोग होनेसे गर्भाशय दुग्ध जाता है, जेवन् गर्भ नहीं रहता ।
९. वामिनी से ।
१. ऐसी दशामें गर्भाशय से रजो वाहर निकल आता है, अतएव गर्भ नष्ट रहता ।
१०. सुचीसुखी से ।
१. ऐसी दशामें गर्भाशयका मुख अत्यन्त छोटा हो जाता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
११. रक्तवाची से ।
१. इसमें वरावर रक्त गिरा करता है । अतएव गर्भ नहीं रहता ।
१२. सावी से ।
१. इस दशा में हमेशा पतला साव हुआ करता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।