भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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गर्भ न रहनेके कारण ।

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४. मेठीसे ।

१. शरीरमें चरबी बढ़कर गर्भाशय नष्ट होनेसे गर्भ नहीं रहता ।

५. अतिसूलासे ।

१. अधिक मोटे होनेसे वीर्य गर्भाशयतक नहीं पहुंचता, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

६. नाटकोष्टीसे ।

१. इस रोग से गर्भाशय नष्ट हो जाता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

७. वृद्धकी से ।

१. इस रोग में निर्बलता के कारण गर्भ नहीं रहता ।

८. प्राकृतयोगिता से ।

१. छोटी अवस्था में रजोगर्भ के पहले पुरुष-संयोग होनेसे गर्भाशय दुग्ध जाता है, जेवन् गर्भ नहीं रहता ।

९. वामिनी से ।

१. ऐसी दशामें गर्भाशय से रजो वाहर निकल आता है, अतएव गर्भ नष्ट रहता ।

१०. सुचीसुखी से ।

१. ऐसी दशामें गर्भाशयका मुख अत्यन्त छोटा हो जाता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

११. रक्तवाची से ।

१. इसमें वरावर रक्त गिरा करता है । अतएव गर्भ नहीं रहता ।

१२. सावी से ।

१. इस दशा में हमेशा पतला साव हुआ करता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।