संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 135, कुल 302 में से
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सन्तति-शास्त्र ।
१३ शुष्की से ।
१. पैंसी दशामें वीर्य गर्भाशयमें सूख जाता है और चहीं जल भी जाता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
८. अनेक प्रकारके योनि-रोगोंसे ।
( इस विषय में इसी पुस्तकका 'योनिरोग' प्रकरण देखो )
१ वातल योनिसे ।
१. वायु के विगड़ जाने से पैंसी योनि वीर्य ग्रहण नहीं करती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
२ पित्तल योनिसे ।
१. पित्तके विगड़ जाने से पैंसी योनि वीर्य ग्रहण नहीं करती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
३ शैलपिण्ड योनिसे
१. कफके विगड़ जानेसे पैंसी योनि वीर्य ग्रहण नहीं करती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
४ लम्निपातिक योनि ।
१. वात, पित्त और कफ के विगड़ने से पैंसी योनि वीर्य ग्रहण नहीं करती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
५ रक्तपित्तजय योनिसे ।
१. रक्तपित्तके विगड़ जानेसे योनि वीर्य ग्रहण नहीं करती अतएव गर्भ नहीं रहता ।
६ अरुजम्भा योनिसे ।
१. गर्भाशय के पित्त से रज विगड़ कर योनिको दूषित कर देता है । पैंसी योनि वीर्य ग्रहण नहीं करती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
७ अक्षर्या योनिसे ।
१. पैंसी योनिमें गर्भदागीसे फीड़े पड़ जाते हैं और इससे