संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 144, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ेंगर्भाधानमें स्त्री और पुरुषकी अवस्था ।
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स्वलिप्त होनेसे अवश्व दोनोंके कीटोंका मिश्रण होता है । अतएव आगे पीछे स्वलिप्त होनेसे गर्भ नहीं रहता ।
३१. गर्भाशयमें मिले हुए रज-बीज्यके बाहर निकल आनेसे
१. ऐसा उस समय होता है जब कि गर्भाधानके समयमें या प्रदर-रोगमें गर्भाशयका मुख आवश्यक्तासे अधिक खुल जाता है । ऐसी अवस्थामें गर्भ नहीं रहता ।
३२. प्रकृतिके विरुद्ध संयोगसे ।
१. उलटे, टेढ़े, करवट इत्यादि होकर संयोग करनेपर गर्भाशयमें विकार उत्पन्न हो जाता है, अतएव गर्भ नहीं रहता । (श० क०)
३४. अधुरा मैथुन होनेसे ।
१. यह दशा उस समय होती है कि जब स्त्रीकी इच्छा देर तक संयोग करनेकी हो और पुरुष उसके पहले ही स्वलिप्त हो जाय । ऐसी अवस्थामें भी गर्भ नहीं रहता ।
(श० क०)
इस प्रकार अनेक कारणोंसे रोगी और नारीग स्त्रियाँ गर्भ धारण नहीं करती । इसमें पुरुष और स्त्री दोनोंको सावधान रहना चाहिये ।
(२४) गर्भाधानमें स्त्री और पुरुष की अवस्था ।
लोग यह समझते हैं कि रजस्वला होनेके साथ ही साथ स्त्रियोंमें गर्भ धारण करनेकी योग्यता भी आ जाती है और चौदह पन्द्रह वर्ष की अवस्थाका पुरुष गर्भाधान कर सकता है । इसमें सन्देह नहीं कि ऐसा हो सकता है, क्योंकि हमारे देशमें कन्याएँ जल्द सयानी बना ली जाती हैं और ब्रह्मचर्य