भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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गर्भाधानका समय ।

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स्त्रीकी अवस्थाके विषयमें मतभेद नहीं है । सब सोलह वर्षकी अवस्थाका निर्णय बतलाते हैं; परंतु पुरुषोंके लिये दो मत हैं । एक आचार्यकी राय है कि २५ और दूसरेका मत है कि २० वर्षकी अवस्था गर्भाधान करने योग्य है । अतएव गर्भाधानके लिये ज्यादासे ज्यादा पुरुषकी अवस्था पच्चीस और कमसे कम बीस होना ज़रूरी है ।

(२५) गर्भाधानका समय ।

समय बड़ा चलवान है । सबको इसके सामने सर भुकाना पड़ता है । बिना इसके कोई बात नहीं होती । यदि समयके विपरीत कोई बात की भी जाय, तो उसका फल उलटा होता है । जिस प्रकार वर्षाके समयमें नये वृक्षलगाये जाते हैं, तरह तरहकी वेलें चढ़ाई जाती हैं, इसी प्रकार स्त्रियोंमें रजोधर्मके पीछे गर्भाधानका समय समझना चाहिये । इस विषयमें अनेक मत हैं ।

१. गर्भाधानका समय ।

१. धर्मशास्त्रका मत ।

१. रजस्वला होनेके चार दिन सहित स्त्रियोंके लिये सोलह दिन-रात्रि स्वाभाविक ऋतु-काल होता है । इनमेंसे आदिमें रजोधर्मकी चार, ग्यारहवीं और तेरहवीं रात्रि निषिद्ध हैं, बाकी १० उत्तम हैं । (मनु० अ० ३ श्लो० ४६-२७)

२. सोलह रात्रियोंमें रजोधर्मकी चार रात्रि निकालकर बाकी रात्रि अच्छी हैं । (व्या० अ० १)

३. स्त्रियोंमें ऋतु रजोदर्शनसे सोलह रात्रि रहता है, उनमें सम रात्रियोंमें गमन करे और आदिकी चार रात्रियोंको छोड़ दे, तो वह ब्रह्मचारी होता है । (या० वि० प्र० ७९)