भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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लिये क्षत्रिय राजाओंकी लड़ाईका हाल मनन किया था । ये सब प्रमाण इस बातके साक्षी हैं कि मनचाही सन्तान उत्पन्न करना माता पिताके हाथोंमें है । माताका गर्भस्थान एक तरहकी विचित्र रसग़ाला है, उस रसशालासे अनेक विचार, अनेक स्वभाव, अनेक बुद्धि और अनेक आकृतिके बालक उत्पन्न होते हैं । सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस रसशालामें आहार, आचरण, व्यवहार और जैसी इच्छाका मेल किया जायगा उससे वैसी ही सन्तान उत्पन्न होगी । जिस प्रकार कुम्हार अनेक यत्न और अनेक विचारोंसे छोटे, बड़े, लम्बे, चौड़े, भारी और हलके पात्र एक ही मिट्टीसे बना लेता है, इसी प्रकार इच्छानुसार अनेक प्रकारकी सन्तान उत्पन्न करना माता पिताके हाथोंमें है ।

राम कृष्ण, युधिष्ठिर और भोज ऐसे सत्यव्रत रावण, कंस, जरासन्ध और हिरण्य कश्यप ऐसे दुष्टोंने भारत माताओंके ही कुक्षिसे जन्म लिया था, पर इनमें इतना अन्तर क्या हुआ ? पुराणोंके देखनेसे पता चलता है कि इनके माता-पिताके रजवीर्यमें विचारों और पोषण-तत्वोंमें बहुत बड़ा अन्तर था । इसी कारण राम, कृष्ण, युधिष्ठिर और भोज सरीखी धर्मात्मा तथा, रावण, कंस, जरासन्ध और हिरण्य-कश्यप सरीखी अधर्मी सन्तान उत्पन्न हुई ।

इन बातोंपर विचार करते हुये कलेजा मुँहको आता है । स्त्रियोंकी हीन दशापर ध्यान देते, हुए शरीर कंपायमान होता