संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 169, कुल 302 में से
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संनतति-शास्त्र ।
स्त्रियोंमें ढके होनेके कारण दिखलाई नहीं देते, परंतु पुरुषोंमें ऊपर चढ़ते साफ दिखलाई पड़ते हैं। इतना ही नहीं, हर समय स्त्री या पुरुषोंका एक अंड ऊपरको चढ़ा रहताहै और उस ऊपर चढ़े हुए अण्डसे ही रज-वीर्य निकल पड़ता है।
अब प्रश्न यह होता है कि अण्ड ऊपरको चढ़ते कैसे हैं? इस विषयमें यह ईश्वरीय नियम है कि दहिनी या बाई जिस ओरकी नाकसे श्वास निकलती हो उसी ओरका अण्ड ऊपरको चढ़ जायगा। अब यहाँपर यह शंका होती है कि दहिनी या बाई नाकसे श्वासका निकलना अपने अधीन है या नहीं? हाँ यह भी हमारे हाथमें है। जब चाहें दहिनी नाकसे श्वास निकाले वा जब चाहें बाईसे। इसमें कुछ किया करनी पड़ती है, यह यह है कि—बाई करवट लेटने से दहिने नाकसे और दहिनी करवट लेटनेसे बाई नाकसे श्वास निकलने लगती है और किसी तरहकी कोई बाधा नहीं होती। (रति-शास्त्र)
पाठकोंको कन्या और पुत्र पैदा करनेके सारे हाल मालूम हो चुके हैं। इन सबका खुलासा यह है कि जब पुत्र पैदा करनेकी इच्छा हो तो रजस्वला होनेके दिनोंसे ४-६-८-१०-१२-१४ और १६ वीं रात्रिको और जब कन्या उत्पन्न करनी हो तो रजस्वला होने से ५-७-९-११-१३ और १५ वीं रात्रिको संयोग करना चाहिये।
दोनोंके दहिने नाकसे श्वास निकलनी चाहिये। इससे दोनों स्त्री और पुरुषका दहिना अण्ड ऊपरको चढ़ जायगा और इसीसे रज वीर्य निकलकर पुरुषके दहिने अंगका वीर्य लीके दहिने अंगके रजसे मिलकर पुत्र उत्पन्न करेगा। इसी भाँति जब कन्या उत्पन्न करनी हो तब स्त्री और पुरुष दोनोंके बाएँ नाकसे श्वास निकलनी चाहिये। इससे