संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 184, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ेंबच्चोंपर माता-पिताके मनोबलका प्रभाव । १६३
किसी सुन्दर पुरुषका दर्शन करना चाहिये । कारण यह है कि स्नान करके जैसे पुरुषका दर्शन स्त्री करता है उसीके रूप-रंगकी सन्तान उत्पन्न होती है । (श० क० )
इसमें एक प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि एक सज्जनकी स्त्री रजस्वला हुई । वह स्नान कर रही थी कि उसी समय में उसका भाई मिलनेके लिये आया । स्त्रीने स्नान करके तुरन्त ही अपने भाईसे भेंट की । संयोगवशात् उसी रजो-दर्शनसे गर्भ रह गया । सन्तान उत्पन्न हुई वह अपने मामाके रूप-रंग और आकृति की थीं ।
२. गर्भाधानके समय मनकी शक्तिका प्रभाव ।
१. इस विषयमें वैद्यकका मत है कि गर्भाधान समयमें जैसे रंग-रूपवाले स्त्री पुरुषका ध्यान या बच्चेकी भलाई बुराई या गुणोंपर माता-पिताका विचार चला जाता है, उसीके अनुसार सन्तान उत्पन्न होती । ( श० क० )
आप ग्रन्थोंका मत है कि गर्भाधानके समयमें जिस जीवमें स्त्रीका चित्त होगा अर्थात् जिस जीवका उसको ध्यान आ जावेगा उसीके अनुसार सन्तान उत्पन्न होगी । (च० श० अ०२ श्लोक० २४) भोज वैद्यने भी ऐसा ही कहा है । इसमें प्रमाण यह है कि—
१. गुजरात देशमें एक सज्जनके घर बन्दरके आकृतिवाली सन्तान उत्पन्न हुई । पिता बुद्धिमान थे । इस बातको अनेक डाक्टरोंसे कहा गया । जाँचसे पता लगा कि एक बन्दर माताके पास रहता था और वह उसे अत्यन्त स्नेहसे पालती थी । पूछनेपर माताने इस बातको स्वीकार किया कि गर्भाधान समयमें उसकी दृष्टि बन्दर पर पड़ी थीं ।