संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 185, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ें१६४
सन्तति-शास्त्र ।
२ महाराष्ट्र देशमें माता-पिताने गर्भाधान समयमें अपने मनकी शक्तिको ज्योतिष-शास्त्रमें लगाकर बालक उत्पन्न किया। बालक बहुत बड़ा ज्योतिषी हुआ।
३. गर्भाधानके बाद मनकी शक्तिका प्रभाव।
१. गर्भाधान होनेतक तो मातापिता दोनोंके मनकी शक्तिका प्रभाव पड़ता है, परन्तु गर्भाधान होनेके बाद बच्चों-पर केवल माताकी ही मनशक्तिका प्रभाव रहता है। तीन मास तक तो कम परन्तु चौथे महिनेसे विशेष प्रभाव पड़ने लगता है। इसका कारण यह है कि बालक का हृदय चौथे महिनेमें बन जाता है। अतएव माताके हृदयमें जो बात उत्पन्न होती है ऐसे समयमें उसका बहुत बड़ा प्रभाव सन्तानपर पड़ता है।
(३० क०)
इसके अनेक उदाहरण हैं।
१ नेपोलियन बोनापार्ट यूरोपमें इतना युद्धवीर क्यों हुआ ? कारण यह था कि जब नेपोलियन गर्भमें था, तो उसकी माता अपने पतिके साथ लड़ाईमें काम करती थी। इस कारण वह संकट और साहससे काम करनेमें निर्भय हो गयी थी। वह घोड़ेपर सवार होती और उसके पतिके अधीन जितने मनुष्य थे सब पर हुकूमत रखती थी। इस वजहसे माताका यह गुण पुत्रमें विकास पाकर इतना बड़ा कि जिसकी वदौलत आजतक नेपोलियन युद्धवीर विख्यात है।
२ एक गर्भवती स्त्रीने अपने पतिसे भगड़ा किया। घरमें स्त्री पुरुष दो ही थे। कई महिनेतक दोनों नहीं चले।