संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 186, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ेंबच्चोंपर माता-पिताके मनोबलका प्रभाव ।
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बच्चा पैदा हुआ, परन्तु वह सुस्त पड़ा रहता । बडे होने पर हर समय उसे गुस्सा रहता । उसे सबसे अलग बैठना पसन्द था । पिता ने इसकी जाँच की तो लड़ाई होना ही इसका कारण प्रतीत हुआ ।
३. अभिमन्युको गर्भमें ही चक्रव्यूहकी लड़ाई मालूम हो गई थी । कथा इस प्रकार है । कि जब अभिमन्यु पेटमें आ, तो उसकी माताके पेटमें दर्द उत्पन्न हुआ । उस समय अभिमन्युके पिता अर्जुनने अपनी स्त्री सुभद्रा देवीका चित्त बँटाने और दुःख भुलवानेके लिये चक्रव्यूहकी लड़ाईका हाल सुनाया था । सुनते सुनते सुभद्रा देवी सो गई । केवल पाँच फाटककी लड़ाईका हाल बालकने गर्भमें सुना । उतना ही हाल अभिमन्युको याद रहा और वह महाभारतमें चक्रव्यूहके पाँच फाटकतक लड़ा और छुटेपर मारा गया, क्योंकि उसको माताके सो जानेके कारण आगेकी लड़ाईका हाल मालूम न हो सका ।
४. महाराज युधिष्ठिर ऐसे न्यायमूर्ति क्यों हुए ? कारण यह था कि जब वे गर्भमें थे तो उनकी माता धर्मशास्त्र पढ़ती थी ।
५. महात्मा बुद्ध ऐसे दयालु क्यों हुए ? कारण यह था कि जब बुद्धदेव गर्भमें थे, तो उनकी माताको प्रजाका कष्ट दूर करनेके विषयमें बहुत कुछ विचार करना पड़ा था ।
४. शरीरके रंगपर मनका प्रभाव ।
१. एक हवशी ( अफ्रीकाका रहनेवाला काला आदमी ) ने अपने जातिकी स्त्रीसे विवाह किया, परन्तु वह स्त्रीको प्यारसे नहीं रखता था । उसका चित्त एक दूसरी सुन्दर और गोरी स्त्रीपर था । एक दिन हवशीने उस