भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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बन्धांपर माता-पिताके मनावलका प्रभाव ।

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संयोग वश गर्भ रह गया । उन्हीं पुतलोंके समान रङ्ग रूपकी सन्तान उत्पन्न हुई । कारण यह था कि गर्भाधान समयमें स्त्रीको उन पुतलोंका ही ध्यान रहा करता था ।

५. शरीरकी सुन्दरता और अँगोंपर मनका प्रभाव ।

१. किसी प्रतिष्ठित घरमें एक कुबडी नित्य मिक्षा माँगने आया करती थी । उसको कहानी कहनेका बड़ा शौक था । जब वह आती तो घरकी सारी स्त्रियाँ उसे घेर लेतीं और कहानी सुन कर जाने देतीं । इनमेंसे एक स्त्री उसको बहुत चाहती थी और वही नित्य मिक्षा भी देती थी । दैव संयोगसे उस स्त्रीको गर्भ रह गया और उस मिक्षा माँगनेवाली स्त्रीके समान सन्तान हुई । कारण यह था कि माता उस स्त्रीको रोज देखती थी और उसका प्रेम उसपर था । अतएव उसका आकार माताके हृदयपर गर्भाधान समयमें भी जमा रहा, इसी कारण उसीके अनुसार सन्तान हुई ।

२. एक घरमें दो स्त्री पुरुष थे । एक स्त्री और आगई, वह कानी और कुरुपा थी । उसी बीचमें गर्भाधान हो गया । सन्तान उत्पन्न हुई तो बच्चेको भी एक आंख थी । कारण पूछनेसे मालूम हुआ कि जिस दिन गर्भाधान हुआ था उस रोज थोड़ी ही देर पहले दोनों स्त्रियाँ पास पास बैठी बातचीत कर रही थीं । गर्भाधान समयमें माताको उस कानी स्त्रीका ध्यान रहा था, इसीलिये ऐसी सन्तानका जन्म हुआ ।

३. अमेरिकाके एक निवासीने दो सुन्दर चित्र खरीदे और अपने सोनेके कमरमें रखवा दिये । दोनों स्त्रीपुरुषका-