भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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सन्तति-शास्त्र ।

इन चित्रोंसे बड़ा स्नेह था। स्त्रीको गर्भ रह गया। उन्हीं चित्रोंके समान सुन्दर सन्तान हुई। कारण यह था कि दोनों ह्रीपुरष चित्रोंसे स्नेह रखते थे और गर्भाधान समयमें दोनोंको उनका ध्यान था।

६. बच्चेके स्वास्थ्यपर मनका प्रभाव ।

१. एक गृहस्थके घरमें बच्चा बीमार था और मानाके पास ही मोता था। दैव संयोगसे उस दिन माताको गर्भ रह गया। उससे जो सन्तान हुई वह सदा रोगी रहनी थी, कारण कि गर्भाधान समयमें मानापिताका चित्त बच्चेके रोगकी ओर था।

२. एक स्त्रीके शरीरमें दर्द था और उसी दिन उसका पति परदेशसे आया। दैव संयोग उस दिन गर्भ रह गया। पुत्र उत्पन्न हुआ वह सदा रोगी रहता था। कारण यह था कि मानापिता दोनोंके चित्तपर रोगका न्याल जमा हुआ था।

७. सन्तान उत्पन्न हो जानेपर मनकी शक्तिका प्रभाव ।

१. जिस समयतक बालक दूध पीता है तबतक बच्चेकी आत्मा माताकी आत्मापर अवलम्बित रहनी है। माताकी आत्माका और दूधका बहुत बड़ा सम्बन्ध रहता है। इसी प्रकार विचार और आत्माका बहुत बड़ा सम्बन्ध है, इस कारण माताके विचारोंका असर दूधपर होता है और उसीके अनुसार सन्तान होती है। जो मानपर नोवी होती हैं उनके बच्चे भी अवश्य कौधी होते हैं। जिन माताओंको मिरगी इत्यादिका रोग है उनके बच्चोंको भी अवश्य मिरगी आती है। बहुतेरे