संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ११ )
बातको मानते हैं कि इस विषयका अधिकांश क्या, प्रायः सारा सामान संस्कृत विद्यामें है और हिन्दी साहित्यमें लानेके लिये बहुत बड़े यत्न किये गये हैं और होंगे ।
इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य गर्भार्धानादि नियमोंको जान कर उत्तम सन्तान पैदा करनेका है । वे ही माता-पिता भाग्य-मान हैं कि जिनकी गोदसे उत्तम और सुयोग्य सन्तान पृथ्वीपर जन्म लेकर संसारका हित करती हैं । अतएव प्रत्येक मनुष्यको उत्तम सन्तान उत्पन्न करनेकी इच्छा न छोड़नी चाहिये । वेद भगवानका वचन है कि
आत्मा वै जायते पुत्रः
‘पुत्र पिताकी आत्मासे पैदा होता है ।’ अतएव उत्तम सन्तान उत्पन्न करनेके नियमोंको जाननेके पहले आपको अपनी आत्मा-को बलवान बनाना चाहिये । जब आपकी आत्मा बलवान होगी और आप उत्तम सन्तान उत्पन्न करनेके नियमोंका पालन करेंगे, तभी उत्तम सन्तान हो सकती है । निदान यह है कि बिना बल-वान आत्मा के उत्तम सन्तान उत्पन्न करने के नियमोंको जाननेपर भी सुयोग्य सन्तान नहीं हो सकती । प्रिय पाठक, अब भूमिका समाप्त होती है । विद्वानो द्वारा सन्तानोत्पत्ति-विषयक मालूम किये हुए प्राकृतिक नियमोंको अपनी तुच्छ बुद्धिके अनुसार पाठकोंके सामने रखनेकी चेष्टा मैंने की है । इत्यलम् ।
अयोध्याप्रसाद भार्गव