संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
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सिद्ध बन जावे. चाहे कोई इश्वर बननेका दावा करें, परंतु मैं यह कहता हूँ कि तुमको हमारे ही यहाँसे अधिकार करनेकी गति और योग्यता प्राप्त हुई है। यह कहा जाता है कि सन्तान संबंधी विषयोंको जाननेके लिये हमारे पास कुछ भी सामान नहीं है। इस विषयपर ध्यान न देने वाले लोग केवल इतना ही कहकर अपनी जिम्मेदारीसे अलग होना चाहते हैं; परंतु ऐसा नहीं हो सकता। क्योंकि जो खी पुत्र सन्तान पैदा करने-वाले हैं, इश्वरकी शीरसे उनपर यह जिम्मेदारी लागू होती है कि वे सन्तान उत्पन्न करनेकी क्रियाओंको आरम्भ करनेके पहले ही इस विषयका ज्ञान प्राप्त कर लें। यदि ऐसा न होगा तो निःसन्देह यह कहा जायगा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पर कुछ भी विचार नहीं किया। हमारे यहाँ क्या नहीं है? लाखों पुस्तकोंके जलाये जानेपर भी इतना सामान है कि जिसका कोई ग्राहक नहीं मिलता। चरक, नुश्रुत और वागभट्ट इत्यादि प्राचीन और नवीन वैद्याने क्या कुछ कम कहा है? परंतु सब कुछ होनेपर भी हम उनपर विश्वास नहीं करते। इसका कारण यह है कि हमको अपने शास्त्रोंपर विश्वास करनेका शिक्षा ही माताओंसे नहीं मिली। हमारे हृदयोंपर अपने शास्त्रोंपर विश्वास करनेका श्रंकुर ही नहीं जमाया गया, जिसके बदौलत आज सर्वस्व हानि हमारी ही है। अतएव दरिद्रोंकी भाँति हमको अपनी पैतृक संपत्ति और अपनी पूँजी-से समृद्धिशाली बननेका प्रयत्न करते रहना चाहिये। हम इस