भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

Devanagarihipublished302 पृष्ठ

पृष्ठ 204, कुल 302 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 204

सन्तानपर माताकी इच्छाका प्रभाव ।

१८३

६. यदि गर्भवतीको राजाके दर्शनकी इच्छा हो, तो अनवान् और भाग्यशाली सन्तान उत्पन्न होती है।

(सु० १० अ० ३ श्लो० २५)

७. उत्तम वस्त्र और आभूषणोंके पहनेकी इच्छा हो तो शौकीन सन्तान पैदा होती है। (सु० १० अ० ३ श्लो० २६)

८. यदि महात्मा और देवताओंके दर्शनकी इच्छा हो, तो धर्मशील और सत्पात्र सन्तान होती है।

(सु० १० अ० ३ श्लो० २७)

९. सर्प इत्यादि देखनेकी इच्छा यदि गर्भवती करे, तो हिंसा करनेवाली सन्तान उत्पन्न होती है।

(सु० १० अ० ३ श्लो० २८)

१०. यदि गोहका मांस खानेकी इच्छा हो, तो बहुत सोने-वाला और सखी वालक उत्पन्न होता है। (२८)

११. यदि गोमांस खानेकी इच्छा करे तो बलवान् और सारे क्रूरों को सहने वाली सन्तान उत्पन्न होती है।

(सु० १० अ० ३ श्लो० २९)

१२. मैसे का मांस खानेकी इच्छा गर्भवतीको हो, तो शूरवीर लाल नेत्रोंवाली योग्युक सन्तान उत्पन्न होती है। (२९)

१३. यदि सूअरके मांसकी इच्छा हो तो सोनेवाली और शूरवीर सन्तान उत्पन्न होती है। (सु० १० अ० ३ श्लो० ३०)

१४. यदि गर्भवतीकी इच्छा रास्ता चलनेकी हो, तो बड़ी बड़ी जंघाओं और बन में विचरनेवाली सन्तान उत्पन्न होती है। (३०)

१५. हिरनका मांस खानेकी इच्छा यदि हो, तो बड़ी जंघाओं-वाली सदा वनचारी सन्तान होती है। (३०)