भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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सन्तति-शास्त्र ।

है । इस थड्कनके मालूम करनेसे बालकका गर्भाशयमें होना निश्चय होता है । यदि यह थड्कन न हो तो मूढ़ गर्भ ( False pregnancy ) समझना चाहिये । ऐसी थड्कन माताकी वार्ड कोखके बीचमें सुनाई पड़ती है । इसकी बाल बालकके सवल और निर्वल होनेपर है । ऊपर जितने लक्षण कहे गये हैं वे सब मूढ़गर्भमें होते हैं; परन्तु उसमें हृदयकी थड्कन नहीं होती । इसीसे गर्भका निश्चय ठीक तीरसे होता है ।

(३३) गर्भमें क्या है ?

उन लोगोंके लिये कि जो आस्त्रके मर्मको जानते हैं, यह मालूम कर लेना कि गर्भमें क्या है, कुछ कठिन नहीं । परन्तु वे लोग जिन्होंने कभी ऐसे विषयपर विचार नहीं किया, जो सदैव इससे अलग रहे, जिन्होंने स्वयंमें भी अपने गार्हस्थ्य-जीवनपर दृष्टि नहीं डाली, उनके लिये तो यह अत्यन्त कठिन विषय है । इसके लक्षण प्रारंभसे ही प्रकट होने हैं; परन्तु दो तीन महीने बाद वे अच्छी तरह मालूम होने लगते हैं । इसमें आचर्य्याके अनेक मत हैं ।

१. वैद्यकका मत ।

१. गर्भाधान समयमें रक्त-वीर्य मिल कर जब गर्भ धारण होता है, यदि उस समय नाभिकी दहिनी ओर थोड़ासा हटकर कुछ दूर हो, तो पुत्र; और यदि नाभिकी बाई ओर कुछ हटकर दूर हो, तो कन्या तथा नाभिके नीचे हो, तो नपुंसकका गर्भ समझना चाहिये । (ततिशास्त्र)

२ दूसरे महीनेमें गर्भ तीन प्रकारसे जाहिर होता है ।

(३०-१०-३०-२-१०-१८)