भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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सन्तति-शास्त्र

अर्थात्

मनुष्य जातिकी उत्तम सन्तान उत्पन्न करनेके नियमोंका संग्रह ।

( १ ) रज और वीर्य क्या हैं और कैसे बनते हैं ?

वैद्यकका मत है कि जो कुछ भोजन किया जाता है वह पकाशयमें पहुँचता है, वहाँ पाचन-शक्तिसे पचकर उसका रस बनता है । इस रसके तीन भाग होते हैं । पहला उत्तम भाग हृदयमें जाता है, मध्यम मल ( पाखाना ) कहलाता है, और तीसरे जलके भागको मूत्र कहते हैं । हृदयमें गया हुआ रस हृदयकी अग्निसे पचता है और रुधिरके रूपमें बदलकर शरीर-रसक रुधिरमें मिल जाता है । रुधिरकी अग्निसे पाचन होकर मल सूक्ष्म और स्थूल दो भागोंमें बँट जाता है । रुधिरका मल पित्त है । यह पित्तसे मिलकर उसको पुष्ट करता है । दूसरा सूक्ष्म भाग रुधिरमें ही रहकर उसकी कमीको पूरा करता है । तीसरा स्थूल भाग शरीरारसक माँसमें मिलता है, और माँसकी अग्निसे पचकर ऊपर बतलाई हुई रीति से बँट जाता है ॥