भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

Devanagarihipublished302 पृष्ठ

पृष्ठ 253, कुल 302 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 253

२३२

सन्तति-शास्त्र ।

बीजके समान सन्तान पूरी उमरतक न जीनेवाली होती है। अतएव स्त्री पुरुषोंको पूरे दिनोंतक ब्रह्मचर्य्य करके संयोग करना चाहिये तभी उत्तम और दीर्घजीवी सन्तान उत्पन्न हो सकती है।

(५७) बच्चा कितने दिनोंमें उत्पन्न होता है ?

जिन माता पिताओंको गर्भाधानका दिन याद रहता है, उनको यह मालूम करनेमें कठिनाई नहीं पड़ती कि बच्चा कब पैदा होगा ? परन्तु जहाँ इसपर कुछ विचार ही नहीं है, वहाँ कैसे पता चल सकता है ? इस विषयमें अनेक मत हैं।

१. डाक्टरोंका मत ।

१. गर्भाधानसे २७८ या २८० दिन पर सन्तान उत्पन्न होती है।

२ कोई कोई गर्भाधानसे ३०० दिनतक उत्पन्न होनेका समय मानते हैं।

२. वैद्यकका मत ।

१ नवें, दसवें और कभी ग्यारहवें महीनेमें बालकका जन्म होता है। यदि इससे अधिक समय बीते तो एक प्रकार-का विकार सम्भूना चाहिये। ( सु० ७० अ० ३ श्लो० ३५ )

२. आहार न पहुँचने से गर्भ पेटमें सूख जाता है या गिर जाता है। गर्भ जब इस प्रकार सूख जाता है, तो कई वर्षोंमें पुष्ट होता है और फिर जन्म लेता है।

( च० ३० अ० २ श्लो० ५४ )

जहाँतक देखा गया है दस मासके अन्दर ही बच्चा पैदा हो जाता है। पैसा कम होता है कि साल भरमें हो और पैसा