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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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अल्पजीवी और दीर्घजीवी सन्तान कैसे होती? २३१

सा पानी निकालने पर सूख जाते हैं और जो कुरपें अच्छी तरह से गले हैं वे चाहे जितना पानी निकालने पर भी, नहीं सूखते, इसी प्रकार जिन माता पिताओंने थोड़े दिन ब्रह्मचर्य पालन करके संयोग किया है, वे झिल्ले कुरपेंके समान हैं, परंतु जिनका ब्रह्मचर्य पूरा पालन हुआ है उनको गहर और गंभीर कुरपेंके समान समझना चाहिये।

एक खेतको देखना चाहिये, उसमें बहुतसे पेड़ हानेपर कुछ छोटे ही रह जाते हैं। कुछ बड़े होते हैं, कुछ सबमें अच्छे रहते हैं। इनका कारण यह है कि जैसा पका हुआ अच्छा वीर्य होता है उसीके अनुसार अच्छे लम्बे चौड़े पेड़ होते हैं। यह बात भी देखनेमें आवेगी कि पके हुए वीर्यके पेड़की जड़ गहरीमें होगी और वह कुछ देरमें सूखेगा परंतु जो पेड़ अध-पके वीर्यसे उगेगा उसकी जड़ तो अधिक नीचे न जायगी और वह जल्द सूख जायगा। इसी प्रकार मनुष्योंमें भी जानना चाहिये। जिन बच्चोंका गर्भ उत्तम और पके रजवीर्यके जन्तुओं से हुआ है, वे दीर्घजीवी अर्थात् ज्यादा दिन जीनेवाले; और जिनका गर्भ खराब कुछ कच्चे वीर्यसे हुआ है वे अल्पजीवी अर्थात् कम दिनों जीनेवाले होते हैं।

अच्छा और पका हुआ वीर्य हानेपर भी अल्पजीवी अर्थात् कम दिनों जीनेवाली सन्तान भी होती है। इसका कारण यह है कि जब अच्छा सूख पका हुआ वीर्य घुन जाता है, तो उससे पेड़ होता ही नहीं। यदि होता भी है तो छोटा और जल्द सूख जानेवाला। इसी प्रकार स्त्री और पुरुषोंके बीजोंमें भी समझना चाहिये। जब स्त्री पुरुषके रजवीर्यके जीव किसी रोगसे दूषित हो जाते हैं तो वह घुने हुए बीजके समान गर्भ ही नहीं उत्पन्न करते। यदि करते भी हैं, तो कच्चे