संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 257, कुल 302 में से
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सन्तति-शास्त्र ।
पसृताका चाहिये । परन्तु कपड़े सब नए हों, यदि नए न हों ओ इतने थोपे हों कि उनमें बन्दू न रहे । कपड़े चाहे नए हों या पुराने, कमसे कम चार दिन धूपमें सुखलाना जरूर चाहिये, इसलिये कि जूहरीले और मामान्य जीव न रहे । ऐसे जीव अनेक प्रकारके रोग उत्पन्न करते हैं ।
इस विषयमें सबसे पहले यह बात स्त्रियोंको निश्चय कर लेनी चाहिये कि बच्चा पैदा होनेमें कितनी देर है ? यह बात प्रायः एक सप्ताह पहले ही स्त्रीके लक्षणोंसे मालूम हो सकती है । वैद्यककामत है कि एक सप्ताह पहलेसे पेट हलका हो जाता है । बच्चा कुछ नीचे उतर आता है, आमाशयपर दबाव नहीं रहता, पेशाब जल्दी जल्दी उतरता है । पाखाना जानेमें कुछ कष्ट होता है । पैंसा होनेके एक दो दिन बाद एक प्रकारका पानी योनिसे निकलने लगता है और कभी कभी मीठा मीठा दर्द भी होता है । ऐसी दशा आठ दस दिनतक प्रायः रहती है । इन्हीं दिनोंमें पैदा होनेका दर्द उठता है । ऐसा दर्द दो प्रकारका होता है—सच्चा और और भूठा । भूठा दर्द प्रारम्भ होते ही खिया संमभ लेनी हैं कि अब बच्चा होनेवाला है । इसमें पीडा और योनिका सकोचन नियमके अनुसार नहीं होता और न बढ़ता है । ऐसा दर्द पेटके अगले हिस्सेमें होता है । सच्चा दर्द यह एक खास दर्द है । यह गर्भाशयके पिछले हिस्सेसे प्रारम्भ होकर आगे आता है । इसमें जरायुका मुख चौड़ा हो जाता है । भूठा दर्द होनेका कारण पाखाना और पेशाबका रुकना है । जब पाखाना पेशाब हो जाता है तब भूठा दर्द शान्त हो जाता है । सच्चे दर्दमें पहले जरायु और इसके बांट उबरके पेगी तन्तुओंमें सकोचनके दवावसे बालक नीचे उतरता है । योनिका मुख फैलता और दर्द चढ़ता चला जाता