संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 49, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ें२८
सन्तति-शास्त्र ।
और यदि चाँपे और है तो दहिने और को, यदि आगे है तो पीछे को यदि पीछे है तो आगे को झुक जाता है ।
इस प्रकार गर्भाशय में वाडी की कड़ी सूजन के कारण और लक्षण होते हैं ।
४ गर्भाशय में बड़ी और फैली हुई सूजन-इसके कई कारण हैं ।
१. गरम सूजन से मवाद न निकलने पर ऐसी सूजन पैदा होजाती है ।
ऐसी सूजन के अनेक लक्षण दिखाई देने हैं ।
१ पैरों का सूख जाना ।
२ गरमी बहुत मालूम होना ।
३ आँखों और कनपटी में दर्द ।
४ पेट का निकल आना ।
५ पैरों पर सूजन का होना ।
६ पेट से लेकर छातियों तक दर्द होना ।
७ गर्भाशय में जखम हो जाना । इसके कई लक्षण हैं ।
१. पेट पीठ और कमर में अत्यन्त पीड़ा ।
२ कई रंगों का बदबूदार स्वास होना ।
८ कञ्चित्त, बेचैनी, प्यास दर्द, आँखों की जलन,
पेट का अपफरा, बुरी डकारों का आना, मन्टानि,
पेशाब में जलन और हिचकी आना ।
इस प्रकार गर्भाशय में बड़ी और फैली हुई सूजन के कारण और लक्षण होते हैं ।
(ब) “डाक्टरों का मत ”
इस विषय में डाक्टरों ने चार प्रकार की सूजन मानी हैं ।
(१) घडकी सूजन (२) गर्दन की सूजन (३) डीवारों की सूजन और (४) भीनरी सूजन । इनके अनेक कारण हैं ।