भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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नन्दानि-शास्त्र ।

१. जब क्रम में दृढ़ हो तो गमांगय के पिछले भागमें सूजन समझनी चाहिये ।

२०. जब पंद्रह में दृढ़ हो और चवकी चने तो गमांगय के मुख पर सूजन समझना चाहिये ।

२१. जब कोखमें दृढ़ हो तो गमांगयकी दीवारोंमें सूजन जाननी चाहिये । जब दहिने कोख में दृढ़ हो तो दहिने और बाँए में दृढ़ हो तो बाँए और । जब दहिने बाँए दोनों और दृढ़ हो तो दोनों और सूजन जाननी चाहिये ।

ये तक्षण और क्रारा गमांगयके थंडकी सूजन, गरदन की सूजन और दीवारों की सूजन के कहे गये हैं । गमांगय की सीनगी सूजन का विदर नीचे लिखा जाता है ।

गमांगयकी सीनगी सूजन दो प्रकारकी होती हैं—एक हल्की दूसरी भारी । पहले हल्की सूजन होती है । जब इसका इतना जोर और तौरमें नहीं होता है तो वह भारी हो जानी है इसके अनेक कारण हैं ।

१. विषम स्वर के होनेसे ।

२. गमांगय के हृंग पहुँचनेसे ।

३. किसी नष्ट हिन जाननेसे ।

४. फेफड़े, गुदके और पालडुगेन के प्रकोपसे ।

५. बच्चा पैदा होने समय की कठिनाईसे ।

६. बच्चा पैदा होनेके बाद गमांगयमें रक्तके जम जानेसे ।

७. बेड़ीका टुकड़ा अन्दर रह जानेसे ।

८. बेड़ी टूटने निकलनेसे ।

९. किसी आँजुलके चोट लगनेसे ।

१०. स्त्रु समयमें सरनी लग जानेसे ।

११. अति मधुन और मधुनमें चोट लग जानेसे ।