संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 58, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ेंगर्भाशयके रोग ।
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कभी कभी हिस्टीरियाकासा दौरा हो जाता है । गरम खट्टी चरपरी और बादी चीजोंके खानेसे यह रोग खूब बढ़ता है । बड़े हुए रोगमें हिस्टीरिया अवश्य होता है ।
८. गर्भाशयका मोटा हो जाना ।
यह कठिन रोग है और इसके अनेक कारण हैं ।
१. बच्चा पैदा होनेपर गर्भाशयमें जखम हो जाना या अच्छी तरहसे न सिकुड़ना ।
२. बारंबार बच्चा होने या गर्भपात होनेसे गर्भाशयका निर्बल होकर न सिकुड़ना ।
३. बच्चा पैदा होने समयमें खेड़ीका कुछ टुकड़ा भीतर रह जाना ।
४. गर्भाशयमें रक्तके इकट्ठा हो जाने और न निकलनेसे ।
५. गर्भाशयमें प्रसवके समय चोट लगनेसे ।
६. प्रसवके बाद ही चलने फिरने और परिश्रम करनेसे ।
७. प्रसवके कुछ दिन बाद ही पुरुष संयोगसे ।
ऐसी दशामें अनेक लक्षण होते हैं ।
१. साँथलों और कमरमें दर्द ।
२. मैथुनमें पीड़ा और पेहूका भारीपन ।
३. पैरपर कुछ सूजन और गर्भअण्डोंमें दर्द ।
गर्भाशय दो तरह से मोटा होता है । एक—जब केवल गर्भाशयका मुख ही मोटा पड़ जाय; दूसरे—जब पूरा या अन्दर-का भाग मोटा पड़ जाय । ऐसी दशामें स्त्री बँध्या हो जाती है ।