भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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गर्भाशयके रोग ।

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२. गर्भाशयसे रज न निकलना ।

इस रोगमें अनेक लक्षण होते हैं ।

१. रजका देरमें और थोड़ा निकलना ।

२. पैहूके सामने उभार और दर्द होना ।

३. अचानक सरदी लगकर शरीरमें ज्वरका प्रकोप हो जाना ।

४. भोजनमें अरुचि, कैं और जी मचलाना ।

यह रोग उस दशामें होता है जब कि मुख संकुचित होनेके कारण गर्भाशयसे रज न निकले । ऐसी दशामें रज गर्भाशयमें जमकर सूख जाता है ।

२४. गर्भाशयमें वीर्य न ठहरना ।

इसके ये कारण हैं ।

१. गर्भाशयमें ऐसे चिकने पदार्थका फैल जाना कि जिससे वीर्य न ठहर सके या गर्भाशय ट्रेढ़ा पड़ गया हो ।

२. हर समय एक प्रकारकी लुवाबदार वस्तुका बहा करना ।

इस दशामें अनेक लक्षण होते हैं ।

१. गर्भाशयमें कुछ भारीपन मालूम होना ।

२. कभी कभी कुछ थोड़ासा दर्द होना ।

यह रोग उस समय होता है जब कि चर्बी बढ़ जाय, जिसके कारण गर्भाशयमें चिकनापन अधिक आ जाय । ऐसी दशामें वीर्य बाहर निकल आता है । गर्भ धारण नहीं होता ।

२५. गर्भाशयमें मांसका बढ़ जाना ।

इसको हफ्म लोग 'औराने रहम' कहते हैं । कारण ये हैं ।

१. रजका गिलाड़ और उसमें भारी तब्दीली ।

२. गर्भाशयके दूसरे रोगोंके संबन्धसे ।

इस दशामें अनेक लक्षण होते हैं ।