संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 73, कुल 302 में से
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सन्तति-शास्त्र ।
१. कमरमें दर्द और चक्कीसी चलना ।
२. पेड़में पीड़ा और भारीपन मालूम होना ।
३. रजका कम निकलना और उसमें कुछ बदबूका आना ।
यह दशा भयानक होती है । जब ऐसा होता है, तो सबसे पहले स्त्रियोंको मोटे होनेका सन्देह होता है । ज्यों ज्यों रोग बढ़ता जाता है, दशा विगड़ती जाती है ।
२६. गर्भाशयमें कीड़ोंका पैदा हो जाना ।
इसको हकीम लोग 'सरत्तान रहम' कहते हैं । इसके कई कारण हैं ।
१. रज दूषित होनेसे ।
२. किसी प्रकारकी छूत पहुँचनेसे ।
३. गर्भाशयमें कोई जगह पक जानेसे और उसमें छूत या किसी प्रकारकी गन्दगी पहुँचनेसे ।
४. गरमी और सूजाकके अनेक विकारोंसे ।
ऐसी दशामें अनेक लक्षण प्रगट होते हैं ।
१. बदबूदार पतला और रंगीन स्त्राव होना ।
२. पेड़में दर्द और अन्दर खुजली ।
३. पिड़लियोंमें दर्द और रीढ़में पीड़ा होना ।
४. रज अधिक निकलना और उसमें बदबू आना ।
यह दशा भयानक होती है, इसमें गर्भाशयको बड़ी हानी उठानी पड़ती है ।
इस प्रकार गर्भाशयके अनेक रोगोंसे स्त्रियाँ पीड़ित रहती हैं । इनमें सबसे बड़ा कारण रजो-धर्मका विगाड़ और स्त्री पुरुषकी असावधानी है । रोग उत्पन्न होते ही उपचार करना आवश्यक है ।