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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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सन्तति-शास्त्र ।

१. कमरमें दर्द और चक्कीसी चलना ।

२. पेड़में पीड़ा और भारीपन मालूम होना ।

३. रजका कम निकलना और उसमें कुछ बदबूका आना ।

यह दशा भयानक होती है । जब ऐसा होता है, तो सबसे पहले स्त्रियोंको मोटे होनेका सन्देह होता है । ज्यों ज्यों रोग बढ़ता जाता है, दशा विगड़ती जाती है ।

२६. गर्भाशयमें कीड़ोंका पैदा हो जाना ।

इसको हकीम लोग 'सरत्तान रहम' कहते हैं । इसके कई कारण हैं ।

१. रज दूषित होनेसे ।

२. किसी प्रकारकी छूत पहुँचनेसे ।

३. गर्भाशयमें कोई जगह पक जानेसे और उसमें छूत या किसी प्रकारकी गन्दगी पहुँचनेसे ।

४. गरमी और सूजाकके अनेक विकारोंसे ।

ऐसी दशामें अनेक लक्षण प्रगट होते हैं ।

१. बदबूदार पतला और रंगीन स्त्राव होना ।

२. पेड़में दर्द और अन्दर खुजली ।

३. पिड़लियोंमें दर्द और रीढ़में पीड़ा होना ।

४. रज अधिक निकलना और उसमें बदबू आना ।

यह दशा भयानक होती है, इसमें गर्भाशयको बड़ी हानी उठानी पड़ती है ।

इस प्रकार गर्भाशयके अनेक रोगोंसे स्त्रियाँ पीड़ित रहती हैं । इनमें सबसे बड़ा कारण रजो-धर्मका विगाड़ और स्त्री पुरुषकी असावधानी है । रोग उत्पन्न होते ही उपचार करना आवश्यक है ।

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