भारतकोश
सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary

माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा

DevanagariHindipublished316 पृष्ठ

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( १० ) भूमिका । कि जितने पण्डित और धर्मके सूक्ष्मभेद जिज्ञासु व्यक्ति हैं। प्रायः सबही इसको एक एक प्रति रखते हैं। इसमे क्रमसे १ चार्वाकदर्शन, २ बौद्धदर्शन, ३ आर्हतदर्शन, ४ रामानुजदर्शन, ५ पूर्णप्रज्ञदर्शन वा वेदान्तदर्शन, ६ नकुलीशपाशुपतदर्शन, ७ शै वदर्शन, ८ प्रत्यभिज्ञादर्शन, ९ रसेश्वरदर्शन, १० औलूक्यदर्शन ११ अक्षपाददर्श न १२ जैमिनीदर्शन १३ पाणिनिदर्शन १४ सांख्यदर्शन १५ पातञ्जलदर्शन इन पन्द्रह दर्शन वा मत या सम्प्रदाय या सिद्धान्तोंका पूर्णतया वर्णन है। इस एकही ग्रन्थके पढनेसे उक्त पन्द्रह मतोंके अनेक ग्रन्थोंके सारभागका बोध होता है। दर्शन शास्त्रोंका अनुवाद करना बहुत कठिन है उसपरभी प्राकृतभाषामे तो ओरभी कठिन है पर जहांतक सरल करते बना अनुवाद किया है-सज्जन पाठकगण अनुवादके दोष परित्यागपूर्वक-मूलके आशयको समझकर इस ग्रन्थसे लाभ उठावेंगे तो मेर । परिश्रम सफल होगा। इसमें पहिली बार उदयनारायणसिंहने इसका अनुवाद किया फिर उसमे जो त्रुटि थी उसको बराबर करके दूसरी बार गोविन्दसूरीने अनुवाद किया है। अलमिति बुद्धिमद्वर्येषु ।

स्थान-मधुरापुर, | प्रथमअनुवादक- डाक विष्टपुर, | उदयनारायणसिंह, जिला, मुजफ्फरपुर. | द्वितीयअ.-गोविन्दसूरी.