भारतकोश
सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary

माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा

DevanagariHindipublished316 पृष्ठ

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दर्शनम् ] भाषाटीकासमेतः । (१९३) संयोगकारण हे एवम् अपेक्षा बुद्धिके अनन्तर उत्पन्न द्वित्वके उक्त प्रति अपेक्षाबुद्धि उत्पादिका है मैं कहता हू द्वित्वादि एकत्वद्वय (एक एक) विषय अनित्यबुद्धि व्यङ्ग नहीं हो सकती क्योंकि पृथक्त्वादिवत् अनेकमें रहनवालागुण है ॥ १२ ॥ निवृत्तिक्रमो निरूप्यते । अपेक्षाबुद्धित एकत्वसामान्यज्ञानस्य द्वित्वोत्पत्तिसमकालं निवृत्तिः, अपेक्षाबुद्धेर्द्वित्वसामान्यज्ञा- नात् द्वित्वगुणबुद्धिसमसमयं, द्वित्वस्यापेक्षाबुद्धिनिवृत्तेर्द्रव्यबु- द्धिसमकालं, गुणबुद्धेः, द्रव्यबुद्धितः संस्कारोत्पत्तिसमकालं द्रव्यबुद्धेस्तदनन्तरं संस्कारादिति ॥ १३ ॥ निवृत्तिक्रम कहते हैं-अपेक्षाबुद्धिसे द्वित्वोत्पत्तिकालमें एकत्वसामान्यज्ञानकी निवृत्ति होती है । द्वित्वत्वसामान्यज्ञानके अनन्तर द्वित्वगुणसमकालमें द्वित्वोत्पादक अपेक्षाबुद्धिकी निवृत्ति होती है अपेक्षाबुद्धिनाशके अनन्तर द्रव्यगुण समकालमें द्वित्वकी निवृत्ति है द्रव्यबुद्धिसे संस्कारोत्पत्तिकालमें गुणबुद्धिकी निवृत्ति होती है अनन्तर सस्कारसे द्रव्यबुद्धिकी निवृत्ति होती है ॥ १३ ॥ तथा च संग्रहश्लोकाः । "आदावपेक्षाबुद्ध्या हि नश्येदेकत्व- जातिधी । द्वित्वोदयसमं पश्चात् सा च तज्जातिबुद्धितः ॥ द्वित्वाख्यगुणधीकाले ततो द्वित्वं निवर्त्तते । अपेक्षाबुद्धिना- शेन द्रव्यधीजन्मकालत ॥ गुणबुद्धिर्द्रव्यबुद्ध्या संस्कारोत्प- त्तिकालत. ॥ द्रव्यबुद्धिश्च संस्कारादिति नाशक्रमो मतः ॥ "इति ॥ बुद्धेर्बुद्धयन्तरविनाश्यत्वे संस्कारविनाश्य- त्वे च प्रमाणं विवादाध्यासितानि ज्ञानानि उत्तरोत्तरकार्यनि- नाश्यनि क्षणिकविभुविशेषगुणत्वात् शब्दवत् । द्रव्यारम्भ- कसंयोगप्रतिद्वन्द्विविभागजनककर्मसमकालमेकत्वसामान्यचि- न्तया आश्रयनिवृत्तेरेव द्वित्वनिवृत्ति कर्मसमकालमपेक्षाबुद्धि- चिन्तनादुभाभ्यामिति संक्षेपः । अपेक्षाबुद्धिर्नाम विनाशकनि- नाशप्रतियोगिनी बुद्धिरिति वोद्धव्यम् ॥ १४ ॥ इसीका सग्रह श्लोकोंमे किया है प्रथम अपेक्षाबुद्धिमे द्वित्वोत्पत्तिसमकालमें एकत्व बुद्धिका नाश होता है इत्यादि सब पूर्वोक्तही अर्थ है पूर्वपूर्व ज्ञानके उत्तरोत्तर ज्ञान १३