सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)
Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary
भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपञ्चमः परिच्छेदः ५५ शादिक्षान्तं तु विज्ञेयं विशुद्धं ब्रह्मपञ्चकम् ॥ शषसहोऽनिरुद्धाद्या विज्ञेयास्त्रिदशेश्वर । (लक्ष्मी० १९।१६-१७) इति लक्ष्मीतन्त्रवचनात् । अथवा वक्ष्यमाणाद् वासुदेवादिबीजचतुष्टयादित्यर्थः । सुव्यक्तलक्षणमित्यनेन केवलगुणमात्रलक्ष्यतयाऽगोचरसुषुप्तिव्यूहापेक्षया स्वप्नव्यूहस्य स्वप्नप्रत्यक्षवदीषद्व्यक्तत्वम्, तदपेक्षयाऽस्य जाग्रद्व्यूहस्य जागरप्रत्यक्षवत् सुव्यक्तत्व- मुक्तं भवति ॥ ५-८ ॥ सर्वप्रथम उस कमल की कर्णिका के ऊपर से केसर पर्यन्त स्थित तेज से परिपूर्ण जाग्रद् व्यूह के कारण भूत भगवान् को तद्वाचक प्रणव बीज से देख कर चारों ओर वासुदेवादि मूर्तियों को देखे। फिर कदम्बपुष्पों के समान मुकुलित सैकड़ों सूर्यों की किरणों से देदीप्यमान उस प्रणव (ॐ) सहित ब्रह्म बीज चतुष्टय (शां षं सं हं) से चारों दिशाओं में उदीयमान वासुदेवादि मूर्तियों को देखे ॥ ५-६ ॥ दिक्क्रमेणोदितं ध्यायेद् विभोर्मूर्तिचतुष्टयम् । सुव्यक्तलक्षणं मान्त्रं विभावेनावृतं बहिः ॥ ७ ॥ स्फुलिङ्गकणतुल्येन समुद्भूतेन वै परात् । वाचकान्तर्निविष्टेन व्यक्ततामागतेन च ॥ ८ ॥ दिशाओं के क्रम से उन विभु की मूर्ति चतुष्टय का ध्यान करे, जो 'सुषुप्ति' होने से आराधना के योग्य है तथा 'स्वप्न व्यूह' की अपेक्षा 'जाग्रत्' होने के कारण अधिक सुव्यक्त है एवं मन्त्र स्वरूप है और बाहर से विभव से आहत है। जो पर से स्फुलिङ्ग कण के समान समुत्पन्न हुआ है और व्यक्त स्वरूप है ॥ ७-८ ॥ वासुदेवादीनां विशेष लक्षणानि तत्राद्यं भगवद्रूपं हिमकुन्देन्दुकान्तिमत् । चतुर्भुजं सौम्यवक्त्रं पुण्डरीकनिभेक्षणम् ॥ ९ ॥ पीतकौशेयवसनं सुवर्णध्वजशोभितम् । मुख्यदक्षिणहस्तेन भीतानामभयप्रदम् ॥ १० ॥ विद्याकोशस्तु वामेन संगृहीतश्च शङ्खराट् । पृष्ठगे ह्यपरस्मिंस्तु प्रोद्यतो दक्षिणे त्वसिः ॥ ११ ॥ वासुदेवादीनां विशेषलक्षणान्याह—तत्राद्यमित्यादिभिः ॥ ९-१८ ॥ अब वासुदेवादि के विशेष तथा मान्य लक्षणों को कहते हैं—उन आद्य भगवान् वासुदेव का स्वरूप हिम कुन्द के समान कान्तिमान है। वह चार भुजाओं से समन्वित हैं और सौम्य वस्त्र तथा कमल के समान विशाल नेत्रों वाले हैं। पीताम्बर धारण किये हुए, सुवर्ण की ध्वजाओं से शोभित हैं और अपने ऊपर वाले दाहिने हाथ से भयभीत