भारतकोश
सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary

भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा

DevanagariHindipublished837 पृष्ठ

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७० सात्वतसंहिता भद्रपीठभुवो मध्ये सुशलक्षणे केवल तु वा ॥ १०९ ॥ ध्यात्वा ध्यात्वा स्वमन्त्रेण ह्यपवर्गफलाप्तये । समर्चनीयं विधिवच्छ्रद्धाभक्तिपुरस्सरम् ॥ ११० ॥ ॥ इति श्रीपाञ्चरात्रे श्रीसात्वतसंहितायां जाग्रत्यूहसमाराधनं नाम पञ्चमः परिच्छेदः ॥ ५ ॥ — ❦ ꕤ ❧ — बहिर्यागस्थानान्याह—वेदामित्यादिभिः ॥ १०८-११० ॥ ॥ इति श्रीमौज्यायनायनकुलतिलकस्य यदुगिरीश्वरचरणकमलार्चकस्य योगानन्दभट्टाचार्यस्य तनयेन अलशिङ्गभट्टेन विरचिते सात्वततन्त्रभाष्ये पञ्चमः परिच्छेदः ॥ ५ ॥ — ❦ ꕤ ❧ — बहिर्याग का उपक्रम करते हैं—पहले से आहत भोगों द्वारा वेदी पर अथवा बिम्ब में या चक्रपङ्कज में पूजन करे । अथवा स्वर्ण निर्मित चक्र में या केवल कमल दल पर ही अर्चन करे । सुन्दर लक्षण वाले भद्रपीठ पर भी यजन किया जाता है । इस प्रकार अपवर्ग रूप फल की प्राप्ति के लिए वैष्णव साधक अपने इष्ट देव की पूजा भक्तिपूर्वक अपने मन्त्र से करे ॥ १०८-११० ॥ ॥ इस प्रकार डॉ० सुधाकर मालवीय कृत सात्त्वत संहिता के जाग्रत्यूहसमाराधन नामक पाँचवें परिच्छेद की हिन्दी समाप्त हुई ॥ ५ ॥ — ❦ ꕤ ❧ —