भारतकोश
सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary

भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा

DevanagariHindipublished837 पृष्ठ

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त्रयोदशः परिच्छेदः ३११ सभी आयुधों के सामान्य लक्षण कहते हैं—ये १७ अस्त्र आयुध शिरोमणि कहे जाते हैं, जो भगवान् की आज्ञा की निरन्तर प्रतीक्षा करते रहते हैं ॥ २६ ॥ ये सभी खड़े रहते हैं, चलते भी रहते हैं । सम स्थान में बैठे भी रहते हैं । अपना हाथ नितम्ब स्थल पर रखे रहते हैं तथा हाथ से चामर का व्यजन (= पंखा) डुलाते रहते हैं ॥ २७ ॥ जब चामर व्यजन दाहिने हाथ से डुलाते हैं तब अपना बायाँ हाथ नितम्ब स्थल पर रखते हैं । जब दाहिने हाथ में कमल धारण करते हैं, तब लीला के लिये किरीट, कौस्तुभ, श्रीवत्स और वनमाला का त्याग करते हैं, इस प्रकार इनका ध्यान करे । इसी प्रकार दुष्ट जनों को भयभीत करते समय चक्र के दाहिने हाथ को अपने मस्तक पर ध्यान करे । किन्तु निराकार अवस्था में उनका अपना- अपना केवल चिह्न ही ध्यान करे ॥ २८-२९ ॥ किरीटादीनाम् अधिष्ठातृन् कथनम् किरीटो हुतभुग् वेद्यः कौस्तुभस्तु प्रभाकरः । स्वयं शशाङ्कं श्रीवत्सो माला षण्माधवादयः ॥ ३० ॥ प्राणं पतत्त्रिराड् विद्धि कालचक्रं महामते । अपाम्पतिर्वै कमलं गदा देवी सरस्वती ॥ ३१ ॥ खं शङ्खः सीरमोषध्यो मुसलं नागनायकः । शब्दादयः सायकास्तु धनुर्विद्धि समीकरम् ॥ ३२ ॥ नन्दकं सर्वशास्त्राणि खेटकं वसुधा स्मृता । ज्ञेयो हि दण्डो नियतिर्वैराग्यं परशुः स्मृतः ॥ ३३ ॥ पाशो मायाऽङ्कुशः कामोऽप्यहङ्कारस्तु मुद्गरः । विज्ञानममलं वज्रं समाधिः शक्तिरुच्यते ॥ ३४ ॥ अथ किरीटादीनामधिष्ठातृनाह—किरीट इत्यादिभिः । माधवादयः ... सन्ता ... प? इत्यर्थः । पारमेश्वरेऽपि— अपांपतिर्वै कमलं गदा देवी सरस्वती । चक्रं लोकप्रतिष्ठा वै शब्दब्रह्म तु शङ्खराट् ॥ —(६।२७८-२७९) इति गदापद्मयोरधिष्ठातृदेवौ सात्वतोक्तशब्दाभ्यामेव प्रतिपादितौ, चक्रशङ्खयोर- धिष्ठातारौ तु शब्दान्तराभ्यामुक्तौ । अतस्तत्रापि लोकप्रतिष्ठा काल इत्यर्थः, सर्वाधारः काल इति प्रसिद्धेः । शब्दो (बृ?बृं)हत्यस्मिन्निति शब्दब्रह्म आकाशमित्यर्थश्च बोध्यः । पारमेश्वरव्याख्याने तु लोकप्रतिष्ठा भूमिरित्युक्तम् । तद्विचारणीयम् ॥ ३०-३४ ॥ अब किरीटी इत्यादि के अधिष्ठातृ देवताओं को कहते हैं—किरीटी के अग्नि अधिष्ठातृ देवता हैं । कौस्तुभ के प्रभाकर अधिष्ठातृ देवता समझना