भारतकोश
सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)

सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)

Satyarth Prakash - Swami Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

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पृष्ठ 324

३२४ | सत्यार्थप्रकाशः


४, वर्ष ५०, मास ०, दिन २१ हरिप्रेम का विस्तार–

आर्यराजावर्षमासदिन
१ हरिप्रेम१६
२ गोविन्दप्रेम२०
३ गोपालप्रेम१५२८
४ महाबाहु२९

राजा महाबाहु राज्य छोड़ के वन में तपश्चर्या करने लगे। यह बंगाल के राजा आधीसेन ने सुन के इन्द्रप्रस्थ में आके आप राज्य करने लगे। पीढ़ी १२, वर्ष १५१, मास ११, दिन २ इनका विस्तार–

आर्यराजावर्षमासदिन
१ राजा आधीसेन१८२१
२ विलावलसेन१२
३ केशवसेन१५१२
४ माधवसेन१२
५ मयूरसेन२०११२७
६ भीमसेन१०
७ कल्याणसेन२१
८ हरीसेन१२२५
९ क्षेमसेन१११५
१० नारायणसेन२९
११ लक्ष्मीसेन२६१०
१२ दामोदरसेन११

राजा दामोदरसेन ने अपने उमराव को बहुत दुःख दिया। इसलिए राजा के उमराव दीपसिंह ने सेना मिला के राजा के साथ लड़ाई की। उस लड़ाई में राजा को मार कर दीपसिंह आप राज्य करने लगे। पीढ़ी ६, वर्ष १०७, मास ६, दिन २२ इन का विस्तार–

आर्यराजावर्षमासदिन
१ दीपसिंह१७२६
२ राजसिंह१४
३ रणसिंह११
४ नरसिंह४५१५
५ हरिसिंह१३२९
६ जीवनसिंह

राजा जीवनसिंह ने कुछ कारण के लिये अपनी सब सेना उत्तर दिशा को भेज दी। यह खबर पृथ्वीराज चह्वाण वैराट के राजा सुनकर जीवनसिंह के ऊपर चढ़ाई करके आये और लड़ाई में जीवनसिंह को मार कर इन्द्रप्रस्थ का राज्य किया। पीढ़ी ५, वर्ष ८६, मास ०, दिन २० इनका विस्तार–

आर्यराजावर्षमासदिन
१ पृथिवीराज१२१९
२ अभयपाल१४१७
३ दुर्जनपाल१११४
४ उदयपाल११
५ यशपाल३६२७

राजा यशपाल के ऊपर सुलतान शाहबुद्दीन गौरी गढ़ गजनी से चढ़ाई करके आया और राजा यशपाल को प्रयाग के किले में संवत् १२४९ साल में पकड़ कर कैद किया। पश्चात् 'इन्द्रप्रस्थ' अर्थात् दिल्ली का राज्य आप (सुलतान शहाबुद्दीन) करने लगा। पीढ़ी ५३, वर्ष ७४५, मास १, दिन १७ इन का विस्तार बहुत इतिहास पुस्तकों में लिखा है, इसलिए यहां नहीं लिखा।

इसके आगे बौद्ध जैनमत विषय में लिखा जायेगा।

इति श्रीमद्दयानन्दसरस्वतीस्वामिकृते सत्यार्थप्रकाशे
सुभाषाविभूषित आर्यावर्त्तीयमतखण्डनमण्डनविषय
एकादशः समुल्लासः सम्पूर्णः ॥ ११ ॥