सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)
Satyarth Prakash - Swami Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| एकादशसमुल्लासः | ३२३ |
|---|
| आर्यराजा | वर्ष | मास | दिन |
|---|---|---|---|
| १३ जीवनलोक | २८ | ९ | १७ |
| १४ हरिराव | २६ | १० | २९ |
| १५ वीरसेन (दूसरा) | ३५ | २ | २० |
| १६ आदित्यकेतु | २३ | ११ | १३ |
राजा आदित्यकेतु मगधदेश के राजा को 'धन्धर्' नामक राजा प्रयाग के ने मार कर राज्य किया। वंशपीढ़ी ९, वर्ष ३७४, मास ११, दिन २६ इनका विस्तार—
| आर्यराजा | वर्ष | मास | दिन |
|---|---|---|---|
| १ राजा धन्धर् | ४२ | ७ | २४ |
| २ महर्षि | ४१ | २ | २९ |
| ३ सनरच्ची | ५० | १० | १९ |
| ४ महायुद्ध | ३० | ३ | ८ |
| ५ दुरनाथ | २८ | ५ | २५ |
| ६ जीवनराज | ४५ | २ | ५ |
| ७ रुद्रसेन | ४७ | ४ | २८ |
| ८ आरीलक | ५२ | १० | ८ |
| ९ राजपाल | ३६ | ० | ० |
राजा राजपाल को सामन्त महान्पाल ने मार कर राज्य किया। पीढ़ी १, वर्ष १४, मास ०, दिन ० इनका विस्तार नहीं है।
राजा महान्पाल के राज्य पर राजा विक्रमादित्य ने ‘अवन्तिका’ (उज्जैन) से चढ़ाई करके राजा महान्पाल को मार के राज्य किया। पीढ़ी १, वर्ष ९३, मास ०, दिन ० इन का विस्तार नहीं है।
राजा विक्रमादित्य को शालिवाहन का उमराव समुद्रपाल योगी पैठण के ने मार कर राज्य किया। पीढ़ी १६, वर्ष ३७२, मास ४, दिन २७ इन का विस्तार—
| आर्यराजा | वर्ष | मास | दिन |
|---|---|---|---|
| १ समुद्रपाल | ५४ | २ | २० |
| २ चन्द्रपाल | ३६ | ५ | ४ |
| ३ सहायपाल | ११ | ४ | ११ |
| ४ देवपाल | २७ | १ | २८ |
| ५ नरसिंहपाल | १८ | ० | २० |
| ६ सामपाल | २७ | १ | १७ |
| ७ रघुपाल | २२ | ३ | २५ |
| ८ गोविन्दपाल | २७ | १ | १७ |
| ९ अमृतपाल | ३६ | १० | १३ |
| १० बलीपाल | १२ | ५ | २७ |
| ११ महीपाल | १३ | ८ | ४ |
| १२ हरीपाल | १४ | ८ | ४ |
| १३ सीसपाल¹ | ११ | १० | १३ |
| १४ मदनपाल | १७ | १० | १९ |
| १५ कर्मपाल | १६ | २ | २ |
| १६ विक्रमपाल | २४ | ११ | १३ |
राजा विक्रमपाल ने पश्चिम दिशा का राजा (मलुखचन्द बोहरा था) इन पर चढ़ाई करके मैदान में लड़ाई की इस लड़ाई में मलुखचन्द ने विक्रमपाल को मार कर इन्द्रप्रस्थ का राज्य किया। पीढ़ी १०, वर्ष १९१, मास १, दिन १६ इनका विस्तार—
| आर्यराजा | वर्ष | मास | दिन |
|---|---|---|---|
| १ मलुखचन्द | ५४ | २ | २० |
| २ विक्रमचन्द | १२ | ७ | १२ |
| ३ अमीनचन्द² | १० | ० | ५ |
| ४ रामचन्द | १३ | ११ | ८ |
| ५ हरीचन्द | १४ | ९ | २४ |
| ६ कल्याणचन्द | १० | ५ | ४ |
| ७ भीमचन्द | १६ | २ | ९ |
| ८ लोवचन्द | २६ | ३ | २२ |
| ९ गोविन्दचन्द | ३१ | ७ | १२ |
| १० रानी पद्मावती³ | १ | ० | ० |
रानी पद्मावती मर गई। इसके पुत्र भी कोई नहीं था। इसलिये सब मुत्सद्दियों ने सलाह करके हरिप्रेम वैरागी को गद्दी पर बैठा के मुत्सद्दी राज्य करने लगे। पीढ़ी
१. किसी इतिहास में भीमपाल भी लिखा है।
२. इनका नाम कहीं मानकचन्द भी लिखा है।
३. यह पद्मावती गोविन्दचन्द की रानी थी।