सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)
Satyarth Prakash - Swami Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्दशसमुल्लासः ४७१
लिये बहिश्त मिला ? जब प्याले भर-भर शराब पीयेंगे तो मस्त हो कर क्यों न लड़ेंगे? रूह नाम यहां एक फरिश्ते का है जो सब फरिश्तों से बड़ा है! क्या खुदा रूह तथा अन्य फरिश्तों को पंक्तिबद्ध खड़े कर के पलटन बांधेगा ? क्या पलटन से सब जीवों को सजा दिलावेगा ? और खुदा उस समय खड़ा होगा वा बैठा ? यदि कयामत तक खुदा अपनी सब पलटन एकत्र करके शैतान को पकड़ ले तो उस का राज्य निष्कण्टक हो जाय। इस का नाम खुदाई है॥ १५३॥
१५४—जब कि सूर्य लपेटा जावे॥ और जब कि तारे गदले हो जावें॥ और जब कि पहाड़ चलाये जावें॥ और जब आसमान की खाल उतारी जावे॥ —मं० ७। सि० ३०। सू० ८१। आ० १।२।३।११॥
( समीक्षक ) यह बड़ी बेसमझ की बात है कि गोल सूर्यलोक लपेटा जावेगा ? और तारे गदले क्योंकर हो सकेंगे ? और पहाड़ जड़ होने से कैसे चलेंगे ? और आकाश को क्या पशु समझा कि उस की खाल निकाली जावेगी ? यह बड़ी बेसमझ और जंगलीपन की बात है॥ १५४॥
१५५—और जब कि आसमान फट जावे॥ और जब तारे झड़ जावें॥ और जब दर्या चीरे जावें॥ और जब कबरें जिला कर उठाई जावें॥ —मं० ७। सि० ३०। सू० ८२। आ० १।२।३।४॥
( समीक्षक ) वाह जी कुरान के बनाने वाले फ़िलासफर! आकाश को क्योंकर फाड़ सकेगा ? और तारों को कैसे झाड़ सकेगा ? और दर्या क्या लकड़ी है जो चीर डालेगा ? और कबरें क्या मुरदे हैं जो जिला सकेगा ? ये सब बातें लड़कों के सदृश हैं॥ १५५॥
१५६—कसम है आसमान बुर्जों वाले की॥ किन्तु वह कुरान है बड़ा॥ बीच लौह महफूज के (अर्थात् सुरक्षित तख्ती पर लिखा हुआ) ॥ —मं० ७। सि० ३०। सू० ८५। आ० १।२१।२२॥
( समीक्षक ) इस कुरान के बनाने वाले ने भूगोल खगोल कुछ भी नहीं पढ़ा था। नहीं तो आकाश को किले के समान बुर्जों वाला क्यों कहता ? यदि मेषादि राशियों को बुर्ज कहता है तो अन्य बुर्ज क्यों नहीं ? इसलिये ये बुर्ज नहीं हैं किन्तु सब तारे लोक हैं। क्या वह कुरान खुदा के पास है ? यदि यह कुरान उस का किया है तो वह भी विद्या और युक्ति से विरुद्ध अविद्या से अधिक भरा होगा॥१५६॥
१५७—निश्चय वे मकर करते हैं एक मकर॥ और मैं भी मकर करता हूँ एक मकर॥ —मं० ७। सि० ३०। सू० ८६। आ० १६।१७॥
( समीक्षक ) मकर कहते हैं ठगपन को, क्या खुदा भी ठग है ? और क्या चोरी का जवाब चोरी और झूठ का जवाब झूठ है ? क्या कोई चोर भले आदमी के घर में चोरी करे तो क्या भले आदमी को चाहिए कि उस के घर में जा के चोरी करे! वाह! वाह जी!! कुरान के बनाने वाले॥ १५७॥
१५८—और जब आवेगा मालिक तेरा और फ़रिश्ते पंक्ति बांध के ॥ और लाया जावेगा उस दिन दोजख को॥ —मं० ७। सि० ३०। सू० ८९। आ० २१।२२॥
( समीक्षक ) कहो जी ! जैसे कोतवाल वा सेनाध्यक्ष अपनी सेना को लेकर पंक्ति बांध फिरा करे वैसा ही इन का खुदा है ? क्या दोज़ख को घड़ा सा समझा है कि जिस को उठा के जहाँ चाहे वहाँ ले जावे! यदि इतना छोटा सा है तो असंख्य कैदी उस में कैसे समा सकेंगे?॥ १५८॥