भारतकोश
सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)

सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)

Satyarth Prakash - Swami Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

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पृष्ठ 472
४७२सत्यार्थप्रकाशः

१५९—बस कहा था वास्ते उन के पैगम्बर खुदा के ने, रक्षा करो ऊंटनी खुदा की को, और पानी पिलाना उस के को॥ बस झूठलाया उस को, बस पांव काटे उस के, बस मरी डाली ऊपर उन के, रब उन के ने॥

—मं० ७। सि० ३०। सू० ९१। आ० १३।१४॥

( समीक्षक ) क्या खुदा भी ऊंटनी पर चढ़ के सैल किया करता है ? नहीं तो किस लिये रक्खी ? और विना कयामत के अपना नियम तोड़ उन पर मरी रोग क्यों डाला ? यदि डाला तो उन को दण्ड किया, फिर कयामत की रात में न्याय और उस रात का होना झूठ समझा जायगा ? फिर इस ऊंटनी के लेख से यह अनुमान होता है कि अरब देश में ऊंट, ऊंटनी के सिवाय दूसरी सवारी कम होती है। इस से सिद्ध होता है कि किसी अरब देशी ने कुरान बनाया है॥ १५९॥

१६०—यों जो न रुकेगा अवश्य घसीटेंगे उस को हम साथ बालों माथे के॥ वह माथा कि झूठा है और अपराधी॥ हम बुलावेंगे फ़रिश्ते दोज़ख के को॥

—मं० ७। सि० ३०। सू० ९६। आ० १५।१६।१८॥

( समीक्षक ) इस नीच चपरासियों के काम घसीटने से भी खुदा न बचा। भला माथा भी कभी झूठा और अपराधी हो सकता है ? सिवाय जीव के, भला यह कभी खुदा हो सकता है कि जैसे जेलखाने के दरोगा को बुलावा भेजे॥ १६०॥

१६१—निश्चय उतारा हम ने कुरान को बीच रात क़दर के॥ और क्या जाने तू क्या है रात क़दर की ?॥ उतरते हैं फ़रिश्ते और पवित्रात्मा बीच उस के, साथ आज्ञा मालिक अपने के वास्ते हर काम के॥

—मं० ७। सि० ३०। सू० ९७। आ० १।२।४॥

( समीक्षक ) यदि एक ही रात में कुरान उतारा तो वह आयत अर्थात् उस समय में उतरी और धीरे-धीरे उतारा यह बात सत्य क्योंकर हो सकेगी ? और रात्री अन्धेरी है इस में क्या पूछना है ? हम लिख आये हैं ऊपर नीचे कुछ भी नहीं हो सकता और यहां लिखते हैं कि फ़रिश्ते और पवित्रात्मा खुदा के हुक्म से संसार का प्रबन्ध करने के लिये आते हैं। इस से स्पष्ट हुआ कि खुदा मनुष्यवत् एकदेशी है। अब तक देखा था कि खुदा फ़रिश्ते और पैगम्बर तीन की कथा है। अब एक पवित्रात्मा चौथा निकल पड़ा। अब न जाने यह चौथा पवित्रात्मा क्या है ? यह तो ईसाइयों के मत अर्थात् पिता पुत्र और पवित्रात्मा तीन के मानने से चौथा भी बढ़ गया। यदि कहो कि हम इन तीनों को खुदा नहीं मानते, ऐसा भी हो, परन्तु जब पवित्रात्मा पृथक् है तो खुदा फ़रिश्ते और पैगम्बर को पवित्रात्मा कहना चाहिये वा नहीं ? यदि पवित्रात्मा है तो एक ही का नाम पवित्रात्मा क्यों ? और घोड़े आदि जानवर, रात दिन और कुरान आदि की खुदा कसमें खाता है। कसमें खाना भले लोगों का काम नहीं॥ १६१॥

अब इस कुरान के विषय को लिख के बुद्धिमानों के सम्मुख स्थापित करता हूँ कि यह पुस्तक कैसा है ? मुझ से पूछो तो यह किताब न ईश्वर, न विद्वान् की बनाई और न विद्या की हो सकती है। यह तो बहुत थोड़ा सा दोष प्रकट किया इसलिये कि लोग धोखे में पड़कर अपना जन्म व्यर्थ न गमावें। जो कुछ इस में थोड़ा सा सत्य है वह वेदादि विद्या पुस्तकों के अनुकूल होने से जैसे मुझ को ग्राह्य है वैसे अन्य भी मज़हब के हठ और पक्षपातरहित विद्वानों और बुद्धिमानों को ग्राह्य है। इस के विना जो कुछ इस में है सब अविद्या भ्रमजाल और मनुष्य