भारतकोश
सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)

राजीव दीक्षित द्वारा

स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 80 में से

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खरल में घुटाई करके सुखा लें। इस प्रकार 21 या कम से कम 7 भावनाएं भुंगराज स्वरस का देकर तैयार इस चूर्ण में इसका आधा बहेड़ा चूर्ण तथा पाँचवां हिस्सा हरड चूर्ण अच्छी तरह मिलाकर बादाम के तेल से तर करके कुल मिश्रण के बराबर मिश्री मिलाकर काँच के पात्र में रख लें। इस योग को 6-6 ग्राम प्रातः तथा सायं दूध के साथ सेवन करना चाहिए। एक सप्ताह बाद मात्रा बढ़ाकर 9 ग्राम तथा तीसरे सप्ताह से 10 ग्राम प्रतिदिन सेवन करें। 41 दिनों तक नियमित रूप से यह प्रयोग करने से सफेद बाल काले होने लगते हैं, बालों का झड़ना बंद होता है तथा इंद्रलुप्त का रोग समाप्त होता है। बहुत प्रशंसित योग है।

— — — — — उपरोक्त नुस्खे की भाँति एक अन्य योग यह है कि भाँगरा तथा त्रिफला चूर्ण समभाग मिलाकर इसमें सफेद साबुत तिल इतना ही पीसकर मिलाएं तथा बाद में सबके बराबर मिश्री मिलाकर प्रयोग करें। 6 माह तक सेवन करने से बालों के तमाम रोग ठीक हो जाते हैं। यह योग नेत्रों के लिए भी अतिशय लाभप्रद है।

— — — — — 200 ग्राम सूखे आँवले, 150 ग्राम शिकाकाई, 100 ग्राम कपूर कचरी, 100 ग्राम नागरमोथा, 40 ग्राम रीठा तथा 40 ग्राम कपूर लेकर सबका महीन कपड़छन चूर्ण बनाकर रख लें। इसमें से 50 ग्राम चूर्ण लेकर लगभग 400 ग्राम उबलते पानी में 15-20 मिनट तक भिगोएं। तदनन्तर मसल-छानकर इस जल से बालों में जड़ों तक मलें। इस प्रयोग से बाल मजबूत होते हैं, उनका झड़ना रुक जाता है तथा काले, मुलायम बने रहते हैं। इससे लीक-जूँ भी नष्ट होती हैं।

— — — — — आँवला क्वाथ, इमली का हिम क्वाथ, मेंहदी का स्वरस, भाँगरे का स्वरस, मुलहटी क्वाथ, का क्वाथ- प्रत्येक 1-1 किलो, दूध 2 किलो व तिल का तेल डेढ़ किलो।

इसे तेलपाक विधि से तैयार करके रख लें। इस तेल को सायं सोते समय बालों की जड़ों में मलना चाहिए। बालों का टूटना, सफेद होना, सिर की रूसी आदि दूर होते हैं।

— — — — — चमेली के पत्ते, चित्रक के पत्ते, लाल कनेर के पत्ते तथा करंज के पत्ते- प्रत्येक 250-250 ग्राम लेकर जल में पीसकर कल्क बनाएं। अब 4 किलो तिल का तेल लेकर इसमें कल्क मिलाकर 16 किलो पानी डालकर पकाएं। तेल सिद्ध हो जाने पर छानकर रख लें।

इस तेल की मालिश से सिर या दाढ़ी के, जहाँ भी बाल उड़ गए हों, वहाँ जल्दी ही पुनः उगने लगते हैं। इस तेल की कुछ दिनों तक नियमित रूप से रूई के फाहे से मालिश करनी चाहिए।

— — — — — जटामांसी तथा वटवृक्ष के अंकुर 50-50 ग्राम, गिलोय स्वरस 4 किलो व तिल तेल 1 किलो लेकर तेल सिद्ध करें।

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