भारतकोश
सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)

राजीव दीक्षित द्वारा

स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 26, कुल 80 में से

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इस तेल की इंद्रलुप्त के स्थान पर धीरे-धीरे मालिश करनी चाहिए तथा नस्य लेना चाहिए। यह काफी असरदार तेल है।

1 किलो अनार के पतों के रस में 125 ग्राम अनार का कल्क व आधा किलो सरसों का तेल मिलाकर तेलपाक विधि से तेल सिद्ध करके रख लें।

इस तेल की मालिश से इंद्रलुप्त तथा खालित्य विकार नष्ट होते हैं।

हरा भृंगराज, हरा आँवला तथा ताजे हरे मेंहदी के पत्ते, सभी 250-250 ग्राम की मात्रा में लेकर कूटकर उनका रस निकाल लें। अब रस में इसके वजन के बराबर पानी मिलाएं तथा 200 ग्राम कपूर कचरी व 200 ग्राम बालछड़ भी कूटकर इसमें मिला दें और रात भर पड़ा रहने दें। सबेरे पूरा घोल धीमी आँच पर पकाएं और जब यह आधा रह जाए तो उतारकर छान लें। अब 200 ग्राम तिल का तेल धीमी आँच पर पकाते हुए तीनों दवाओं का क्वाथ थोड़ा-थोड़ा करके डालते जाएं। जब सारा रस जल जाए और मात्र तेल बच रहे तो उतारकर निथारने के बाद गाद अलग करके तेल बोटलों में भर लें।

इस तेल की मालिश रात में सोने से पूर्व बालों की जड़ों में करनी चाहिए तथा साथ ही कम-से-कम सौ बार कंधी करें। यह तेल बालों के लिए अत्यन्त हितकारी है।

गिलोय-आधा किलो, शतावरी चूर्ण-320 ग्राम, गोखरू चूर्ण-320 ग्राम, बाराहीकन्द-400 ग्राम, शुद्ध भिलावा-640 ग्राम, छिलकारहित तिल-320 ग्राम, चित्रकमूल-200 ग्राम, काली मिर्च-160 ग्राम, सोंठ-160 ग्राम, पीपल-160 ग्राम, मिश्री-1 किलो 400 ग्राम, शहद-700 ग्राम, विदारीकन्द-320 ग्राम तथा गोघृत-350 ग्राम।

पहले भिलावे तथा तिल को मिलाकर चूर्ण बनाएं। पश्चात् काष्ठौधियों का चूर्ण इसमें मिलाकर खरल करके एकरस कर शक्कर मिश्रित करके रख लें।

इसमें से 3-4 ग्राम की मात्रा दिन में दो बार घी तथा शहद के साथ सेवन करें। यह योग खालित्य, इंद्रलुप्त आदि अनेक रोगों में अत्यन्त हितकर है।

बाल चकत्तों के रूप में उड़ गए हों, गंज हो या पक रहे हों तो निम्न चिकित्साक्रम अपनाना चाहिए -

  1. 1 ग्राम आमलकी रसायन, 2 ग्राम मिश्री के साथ प्रातः तथा इतनी ही मात्रा सायं खाली पेट पानी से सेवन करें।
  2. इसके 1 घण्टे बाद 3 ग्राम शतावरी चूर्ण 10 ग्राम त्रिफला घृत में मिलाकर दूध के साथ प्रातः तथा इसी तरह सायं सेवन करें।
  3. त्रिफला, काले तिल तथा भृंगराज सभी समभाग लेकर चूर्ण बनाकर इसके बराबर पिप्सी मिश्री मिलाकर रख लें। इसमें से 10 ग्राम चूर्ण की एक मात्रा भोजन के बाद लें।
  4. सिर में प्रतिदिन सायंकाल सोने से पूर्व भक्ष्मराज तेल की मालिश करें।

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