भारतकोश
सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)

राजीव दीक्षित द्वारा

स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 31, कुल 80 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 31

WWW.RAJIVDIXITJI.COM | AUDIO | VIDEO | ANDROID APP

शरीर और साँसों की बदबू भगाइए

शरीर और साँसों में बदबू आने के आंतरिक और बाह्य दोनों तरह के कारण हो सकते हैं। एक तो खान-पान की गड़बड़ी या किसी रोग की वजह से बदबू आ सकती है, दूसरे शरीर और दाँतों व मुँह की साफ़-सफ़ाई में की जा रही लापरवाही से भी बदबू की समस्या पैदा हो सकती है। बदबू की समस्या के यदि शारीरिक विकार, जैसे कि -दाँतों, मसूड़ों की ख़राबी, पेट की गड़बड़ी, टॉन्सिल की सूजन-पस, नाक व साइनस विकार, श्वासनली व फेफड़ों के विकार, मुँह के छाले, रक्त की कमी, मधुमेह, यकृत-गुर्दों की बीमारी, पीनस आदि कारण हों तो आहार-विहार ठीक रखते हुए आवश्यक उपचार करना चाहिए और यदि बाह्य कारण हों, तो साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखते हुए निम्न उपाय अपनाए जा सकते हैं-

- - - - - बेलपत्र, आँवला, हरड चूर्ण मिलाकर शरीर में लेप करके कुछ देर बाद धो दें। इससे शरीर और पसीने की दुर्गंध से छुटकारा मिलता है।

- - - - - सुपारी, जायफल, शीतलचीनी, कपूर, लौंग तथा लता कस्तूरी को पान में रखकर ज़रा सा चूना लगाकर चबाने से मुख शुद्धि होती है तथा दुर्गंध खत्म होती है। यह पान मसूड़े, दाँत तथा जीभ के लिए भी हितकारी है। ध्यान रखने योग्य इतना सा है कि रक्त-पित्त के रोगियों, बहुत दुर्बल, भूखे, प्यासे तथा मूर्च्छा से पीड़ित लोगों के लिये पान सेवन वर्जित है।

- - - - - साँस में बदबू आती हो तो ऐसे लोगों को नीम की दातून नियमित करनी चाहिए। इसके अलावा खाने के बाद मुँह अच्छी तरह साफ़ रखें।

- - - - - दो चम्मच शहद को 1 गिलास पानी में घोलकर गरारा करने से हफ़्ते भर में मुँह की दुर्गन्ध से आसानी से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ दाँत की सफ़ाई और खान-पान पर भी ध्यान दें तो उत्तम है।

- - - - - मुँह की दुर्गंध दूर करने के लिए दोनों समय भोजन के बाद अथवा यदा-कदा सौफ़ चबाना चाहिए। इससे हाज़मा भी दुरुस्त होता है।

- - - - - चंदन, मुक्ता, हरड, नागरमोथा, उशीर व लोध का लेप बनाकर शरीर में लगाने से दुर्गंध की समस्या से निजात मिलती है।

pg. 31