भारतकोश
सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)

राजीव दीक्षित द्वारा

स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 80 में से

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सौन्दर्य में निखार लाए मालिश

तेल मालिश का आनन्द जानना हो तो उगते सूरज की लाली में तेल मालिश कराते किसी पहलवान से मिलिए। मालिश से शरीर में जो उमंग-स्फूर्ति, कांतिमयता पैदा होती है, उसका एहसास कुछ दिन नियमपूर्वक मालिश करने के बाद ही जाना जा सकता है। मालिश इतना प्राकृतिक है कि पशु-पक्षी भी अपने-अपने तरीके से इसका लाभ लेते ही हैं। गधों को लोट-लोटकर मालिश का आनंद उठाते तो आपने देखा ही होगा। पशु बच्चे जनने के बाद चाट-चाटकर एक तरह से अपने बच्चों की मालिश ही करते हैं। घोड़े को खराश देने की कितनी ज़रूरत पड़ती है, यह उसका मालिक ही जानता है। पक्षियों भी अपने बच्चों को चोंच और पंखों से सहला-सहलाकर उनमें उमंग भरती रहती है।

मतलब यह कि मालिश बड़े काम की चीज़ है। दुनिया के विभिन्न मानव समाजों में मालिश का इतिहास कोई नया नहीं है। अगर यूनान व रोम की महिलाएं अपना रूप यौवन कायम रखने के लिए मालिश का सहारा लेती थीं, तो मेडागास्कर-अफ्रीका की जंगली जातियों तक में शरीर में खून बढ़ाने के लिए हजार साल पहले भी मालिश का प्रचलन था। अफ्रीका में विवाह से पूर्व वर-वधू दोनों की नित्य मालिश की प्रथा रही है। हिंदुस्तान में तो यह परंपरा कहीं 'हल्दी' और से आज तक बनी ही हुई है। इटली, ईरान, तुर्की व अरब देशों की यात्रा करने वालों को मालूम ही होगा कि वहाँ के हामामखानों में आज भी मालिश को कितनी अहमियत दी जाती है। पश्चिमी देशों में तो खैर मसाज सेण्टरों की भरमार ही होने लगी है। फ्रांस मालिश विद्या को प्रचारित करने में एक तरह से अग्रणी भूमिका निभा रहा है। वहाँ इसे बाकायदा चिकित्सा व्यवसाय और कला की दृष्टि से अपनाया जा रहा है।

हमारे लिए गर्व की बात यह है कि मालिश के चिकित्सकीय लाभों का ज्ञान दुनिया ने प्राचीन भारत से ही प्राप्त किया। हमारे आयुर्वेदिक ग्रंथों में मालिश की जितनी वैज्ञानिक जानकारी और विधियाँ वर्णित हैं, वह अपने आपमें आश्चर्यजनक ही है। यूँ मालिश की विधियाँ कई तरह की हैं, पर यहाँ हम सौन्दर्य की दृष्टि से सिर्फ़ तेल मालिश की चर्चा करेंगे। चरक संहिता के पाँचवें अध्याय के निम्न श्लोक तेल मालिश की महत्ता अच्छी तरह व्यक्त करते हैं-

न चाभिधाताभिहतं गात्रमभ्यंग सेविनः।

विकारं भजतेऽत्यर्थं बलकर्मणि वा क्वचित्॥

अर्थात्-

को

संपन्न करने में समर्थ होता है तथा मालिश से त्वचा विकार रहित रहती है। यानि कि मालिश से शक्ति और सामर्थ्य में वृद्धि होती है।

पचित्तांगश्च बलवान प्रियदर्शिनः।

भवत्यभ्यंग नित्यत्वान्नरोऽल्प जर एव च॥

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