सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
पृष्ठ 42, कुल 80 में से
संदर्भ में पढ़ेंWWW.RAJIVDIXITJI.COM | AUDIO | VIDEO | ANDROID APP
‘तेल मर्दन से त्वचा चिकनी, स्पर्श में कोमल, बलवान और सुंदर हो जाती है। साथ ही शरीर भी बलवान और प्रियदर्शी होता है तथा बुढ़ापे के लक्षण कम दिखाई देते हैं।’
संवाहनश्रम हरं वृष्यं निद्रासुखप्रदम्।
मांसासूक्त्यक् प्रसन्नत्वकुर्यादवात कफापहम् ।।
इसका अर्थ यह है कि ‘शरीर की मालिश श्रमनाशक धातुओं को पुष्ट करने वाली, अच्छी नींद लाने वाली, मांस, त्वचा व रक्त को निर्मल करने वाली तथा वात, कफ का शमन करने वाली होती है।’
इतनी चर्चा के बाद उम्मीद है कि आप की समझ में अच्छी तरह आ गया होगा कि स्वास्थ्य और सौन्दर्य बनाए रखने के लिए तेल मालिश कितना जरूरी है। संक्षेप में तेल मालिश का मुख्य लाभ यह है कि त्वचा कांतिमान, झुर्रिरहित, निरोग और मजबूत रहती है। रक्त संचार ठीक रहता है। शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है। विभिन्न अंगों को बल मिलता है। शरीर का लचीलापन कायम रहता है तथा बुढ़ापा देर से आता है। यह भी विशेष बात है कि तेल मालिश से दुबले लोगों का शरीर मांसल और पुष्ट होता है तथा मोटे लोगों का मोटापा घटता है। इसके अलावा मालिश से शरीर दर्द, सिरदर्द, हाथ-पैरों का कंपन, वात-व्याधि, जोड़ों का दर्द, अनिद्रा आदि में भी आराम मिलता है। इतना जानने के बाद, आजकल के कुछ अंग्रेजीदा लोग और एलोपैथी के डॉक्टर अगर तेल मालिश को फिजूल की चीज़ ठहराएं तो उनकी बातों पर खास ध्यान न देते हुए आप शौक से इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कीजिए और अपने पोर-पोर में शक्ति, कांति और स्फूर्ति का एहसास करिए।
तेल मालिश के लिए जरूरी बातें
- 1. यूँ तेल मालिश आप पूरे साल कर सकते हैं फिर भी बसंत और जाड़े का 3-4 माह का समय इसके लिए विशेष लाभकारी है।
- 2. उगते सूरज की लालिमा में प्रातःकाल तेल मालिश करना सबसे अच्छा है। वैसे दिन में कभी भी खाली पेट तेल मालिश कर सकते हैं।
- 3. तेल मालिश के समय शरीर पर कम से कम कपड़े रहने चाहिए; जैसे कि निक्कर, जांधिया, लंगोट आदि।
- 4. सामान्यतः मालिश खुले हवादार स्थान पर करनी चाहिए। शरीर निर्बल हो और तेज़ असह्य हवा चल रही हो तो बंद कमरे में भी मालिश कर सकते हैं।
- 5. घर में यदि पति-पत्नी दोनों मौजूद हों तो परस्पर एक-दूसरे की मालिश कर सकते हैं। यह सुविधाजनक रहेगा, अन्यथा अपने शरीर की खुद मालिश करें।
- 6. जमीन पर चटाई आदि बिछाकर बैठकर मालिश करें। जिस अंग की मालिश करें ध्यान उसी अंग पर एकाग्र रखें और मन में उमंग के भाव बनाएं।
- 7. तेल मालिश नीचे के अंगों से शुरू करके ऊपर की ओर करनी चाहिए। अर्थात् पाँव के तलुओं से मालिश की शुरूआत करके क्रमशः पंजे, पिंडिलियों, घुटना, जाँघ, नितंब, कमर, पेट, सीना, पीठ, गर्दन, चेहरा और सिर तक पहुँचें। इसे यूँ कहें कि पहले दोनों पैरों की बारी-बारी से
pg. 42