भारतकोश
सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)

राजीव दीक्षित द्वारा

स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 43, कुल 80 में से

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मालिश करने के बाद, कमर, पेट व सीना, फिर दोनों हाथ, गर्दन और चेहरे व सिर की मालिश करें।

8. मालिश की दिशा हृदय की ओर होनी चाहिए। हाथ-पैर की मालिश पंजों से शुरू करें और कंधों व नितंब तक बढ़ें। पेट-कमर पर भी नीचे से ऊपर की ओर हृदय की दिशा में मालिश करें। पेट और सीने की मालिश गोलाकार हाथ घुमाते हुए भी करें। पीठ की मालिश रीढ़ स्थान से शुरू करके किंचित ऊपर दिशा में बाहर की ओर करें। गर्दन की मालिश अंदर से बाहर की ओर तथा चेहरे की मालिश गालों से कनपटी की ओर करें। सामान्य समझ इतनी रखें कि हृदय से निकली धमनियों की गति की विपरीत दिशा में मालिश विशेष लाभप्रद है।

9. अनावश्यक दबाव देने के बजाय हल्का दबाव देते हुए आहिस्ता-आहिस्ता मालिश करनी चाहिए। कम-से-कम 15-20 मिनट और ज्यादा-से-ज्यादा 45 मिनट तक मालिश करें।

10. बच्चों की मालिश प्रातःकालीन सूर्य की रोशनी जहाँ पड़ती हो वहाँ करनी चाहिए। इससे उनके शरीर को विटामिन 'डी' आसानी से प्राप्त हो सकेगी। बच्चों की मालिश के लिए नारियल, सरसों, जैतून के तेल उत्तरोत्तर बेहतर हैं। गाय के घी या मक्खन से मालिश करें तो अति उत्तम।

11. स्त्रियों की तेल मालिश के लिए ध्यान देने वाली विशेष बात यह है कि उन्हें अपने वक्षस्थल की मालिश में सावधानी बरतनी चाहिए। स्तनों पर सावधानी पूर्वक चारों ओर से हल्के हाथों स्तन के अग्रभाग की ओर मालिश करें। मासिक स्त्राव या गर्भकाल की स्थिति हो तो पेट एवं गर्भाशय के हिस्से को छोड़कर शेष शरीर की मालिश करनी चाहिए।

मालिश के लिए उपयोगी तेल

स्थानीय वातावरण और शरीर की प्रकृति को देखते हुए अपने अनुकूल तेल का चुनाव करना विशेष लाभप्रद रहता है। सामान्यतः सर्दी के मौसम में सरसों का तेल, बरसात के दिनों में तिल का तेल तथा गर्मी में नारियल तेल की मालिश विशेष हितकर है। शारीरिक प्रकृति के हिसाब से तेल का चयन करना हो तो कफ प्रकृति वालों को सरसों का तेल, वात प्रकृति वालों को तिल का तेल तथा पित्त प्रकृति वालों को नारियल का तेल चुनना चाहिए।

इन कुछ मुख्य तेलों के अलावा जैतून का तेल किसी भी मौसम में उपयोग में लिया जा सकता है। जैतून के तेल की मालिश से त्वचा की रंगत सुधरती है और उसमें मुलायमियत आती है। यह तेल स्त्रियों के वक्ष को विकसित करने की दृष्टि से भी विशेष लाभदायक है। बादाम का तेल भी काफी फायदेमंद है। यह पलकों और भौंहों को मीम का तेल, महुए का तेल, अरण्डी का तेल, चंदन का तेल, चमेली का तेल आदि भी उपयोग में लाए जाते हैं। आवश्यकतानुसार इन तेलों में औषधियों का मिश्रण करके या दो-तीन तेलों को आपस में मिलाकर मालिश किया जाता है। जैसे कि नारियल, अरण्डी और तिल का तेल समान भाग में मिलाकर सिर में मालिश करने से बालों की कई समस्याएँ दूर होती हैं। पुराना चूना तिल के तेल में मिलाकर लगाने से दाद के कष्ट में राहत मिलती है। पार्यरिया रोग या दाँतों के तमाम कष्टों में सरसों के तेल में चुटकी भर हल्दी और बारीक नमक मिलाकर दाँतों व मसूड़ों की मालिश करने से काफी लाभ मिलता है। शरीर में ताजगी लाने और त्वचा की रूक्षता दूर करने के लिए स्नान से आधा घण्टा पहले सरसों के तेल में समान भाग दही मिलाकर मालिश करनी चाहिए।

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