सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
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मुहासे निकलते हों तो सोते समय नारियल तेल में नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर चेहरे की मालिश करना हितकर रहता है। धूप में त्वचा झुलस जाए तो नारियल के तेल में थोड़ा नमक मिलाकर मालिश करें और 15-20 मिनट बाद धोएं। 5 तोला नारियल तेल में 2 तोला नमक तथा 2 तोला नींबू का रस मिलाकर मालिश करने से सारे शरीर की त्वचा की कोमलता और सुंदरता बढ़ती है।
इसी तरह अरण्डी के तेल में थोड़ा सा नमक और कपूर मिलाकर दिन में दो बार मसूहों की मालिश करनी चाहिए। अरण्डी के तेल में बराबर मात्रा में शहद मिलाकर चेहरे पर मालिश करने से त्वचा कोमल बनती है और झुर्रियाँ मिटती हैं। चेहरे की त्वचा का सूखापन जैतून के तेल में मलाई मिलाकर मालिश करने से ठीक हो जाता है। धूप में झुलसकर त्वचा साँवली पड़ गई हो तो जैतून के तेल में बराबर मात्रा में सिरका मिलाकर मालिश करें। मुहासों में जैतून के तेल में समान भाग नींबू का रस मिलाकर मालिश करने से लाभ मिलता है। होंठों का कालापन कम करने के लिए बादाम के तेल में नींबू का रस मिलाकर नियमित मालिश करनी चाहिए। खाज, खुजली में चंदन के तेल में नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर मालिश करना हितकर है। कोढ़ की बीमारी में नीम के तेल में चालमोगरा का तेल मिलाकर मालिश करने से विशेष लाभ मिलता है। पित्ती की तकलीफ़ में नीम के तेल में समान भाग सरसों का तेल मिलाकर मालिश करने से आराम मिलता है। इस तरह से विभिन्न स्थितियों में विभिन्न औषधि द्रव्यों व तेलों के मिश्रण से मालिश करके लाभ उठाया जा सकता है।
तेल मालिश से कब बचें
तेल मालिश के इतने ढेर सारे लाभों के बावजूद कुछ परिस्थितियाँ ऐसी भी हैं जबकि इससे बचने की भी ज़रूरत पड़ सकती है। सामान्यतः ऐसी परिस्थितियाँ कम ही होती हैं, फिर भी इन्हें जान लेना चाहिए और कुछ खास तरह के रोगियों को तेल मालिश नहीं करनी चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार रक्तस्राव की स्थिति, बुखार, विरेचन के बाद, वमन के बाद, विषग्रस्तता, मूच्छा की उग्रावस्था, उग्र सूजन, दाह-जलन, अत्यन्त कमज़ोरी तथा पेट के कुछ गंभीर रोगों की अवस्था में तेल मालिश नहीं करनी चाहिए। शेष अनुकूल परिस्थितियों में नियमित तेल मालिश करिए और ताउम्र ताज़गी के अहसास से सराबोर रहिए।
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