सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
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तो कम से कम 15-20 मिनट तो लगाएं ही। इस समय में आपको नियमित रूप से प्रणव (ओ॒डम्) का अर्थचिन्तन के साथ जप करना है।
जप का तरीका यह है कि सबसे पहले आप पवित्र भाव के साथ सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं। रीढ़ सीधी रखें। अब कम से कम तीन और अभ्यास अच्छा हो तो अधिक से अधिक 21 प्राणायाम करें। इस दौरान ओम् या प्राणायाम मंत्र (ओं भूः ओं भुवः ओं स्वः ओं महः ओं जनः ओं तपः ओं सत्यम्) का मानसिक जाप करते रह सकते हैं। प्राणायाम के बाद लम्बी गहरी साँस लेकर धीरे-धीरे मुँह से साँस छोड़ते हुए 'ओम्' का सस्वर उच्चारण करिए। ओंकार जप के साथ इसका अर्थचिन्तन भी अवश्य करिए। शुरु में 'ओ॒डम्' का उच्चारण करने के बाद थोड़ी देर रुककर अर्थ का विचार कर सकते हैं, बाद में जप के साथ ही अर्थ की भावना करने का भी अभ्यास हो जाता है।
जहाँ तक 'ओ॒डम्' के अर्थ का सवाल है तो इसमें शामिल अकार, उकार और मकार से ईश्वर के वाचक बहुत से नाम बनते हैं, पर सामान्यतः 'ओ॒डम्' के 'सर्वरक्षक' अर्थ की भावना कर सकते हैं। अर्थात् अपनी बुरी आदतों के प्रति प्रायश्चित्त का भाव रखते हुए स्मरण करिए कि परमात्मा सर्वरक्षक है, वह हमारी हर प्रकार के दुर्गुणों से रक्षा करे और हममें भी दूसरों के प्रति रक्षक बनने का भाव प्रबल हो। अलबत्ता, अपनी जिन बुराइयों को आप दूर करना चाहते हैं उन पर क्रमशः एक-एक करके अभ्यास करें और संकल्प के साथ-साथ आत्मसुधार के लिए पुरुषार्थ करें तो एक दिन आप पाएंगे की अपनी तमाम बुरी आदतों पर आपने नियंत्रण कर लिया है। 'ओ॒डम्' का जप आप सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समय नियमित करें। जप के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात अर्थ की भावना है। याद रखें कि सिर्फ मिश्री-मिश्री चिल्लाने से मुँह मीठा नहीं होता। इसलिए जो लोग मन्त्रों का सिर्फ उच्चारण करते हैं, उनकी जप क्रिया को निष्फल ही समझिए। चरित्र में सार्थक बदलाव लाने के लिए तो महर्षि पंतजलि के 'तज्जपस्तदर्थावन्म' योगसूत्र के अनुसार ही जप करना चाहिए। जो लोग विधिपूर्वक ध्यान-संध्या करते हैं, उन्हें तो खैर यह सब समझाने की जरूरत ही नहीं है।
3. आपकी जो भी बुरी आदतें हों, उन्हें स्पष्ट रूप से एक पर्ची या डायरी में लिखें। दिन में यदा-कदा इन्हें पढ़ें और दुर्गुणों को दूर करने का संकल्प दोहराएं। मान लीजिए कि आपको गुस्सा बहुत जल्दी आता है तो सबसे पहले ध्यान दीजिए कि आपको किन स्थितियाँ में गुस्सा जल्दी आता है और फिर वैसी स्थितियाँ की संभावना बनते ही अपना संकल्प दोहराना शुरू कर दीजिए और धैर्य से काम लेने की मानसिकता बनाइए। यदि गुस्सा आने ही लगे तो धीरे-धीरे गहरी साँस लेकर धीरे-धीरे ही छोड़ने का प्राणायाम करिए। इससे क्रोध पर काबू पाना आसान हो जाएगा। कुछ दिनों तक जैसे तैसे भी अगर आप यह अभ्यास कर ले गए तो धीरे-धीरे गुस्सा न करने की आपकी सहज प्रवृत्ति ही बन जाएगी। इसी तरह एक-एक कर अपने अन्य दुर्गुणों से भी छुटकारा पा सकते हैं।
की समीक्षा अवश्य करें। जितने अंश में आपको सफलता मिली हो, उसके लिए परमात्मा को धन्यवाद दीजिए और यदि कुछ त्रुटि रह गई हो तो उसके लिए प्रायश्चित्त का भाव बनाइए और अपनी संकल्प-शक्ति
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