भारतकोश
सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)

Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)

राजीव दीक्षित द्वारा

स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 67, कुल 80 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 67

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साबुन विरोधी इतनी बातों के बाद सवाल यह है कि अब अगर साबुन न लगाएँ तो कैसे नहाएँ ? साबुन लगाने की जिनकी रोज की आदत है, उनके लिए बगैर साबुन के स्नान की कल्पना तो और भी कष्टदायी है। पर यह वास्तव में एकदम से मुश्किल नहीं है। मन को थोड़ा दृढ़ कर लीजिए तो साबुन की ज़रूरत बड़ी आसानी से समाप्त हो जाएगी। त्वचा प्रकरण में वर्णित नुस्खों में साबुन के कई बेहतर घरेलू विकल्प मिल जाएँगे। उन्हें इस्तेमाल करके त्वचा के सौन्दर्य की ज्यादा अच्छी देखभाल की जा सकती है। यूँ शरीर पर कुछ भी न लगाएँ तो भी नहाते समय गीले तौलिये से रगड़-रगड़कर त्वचा की सफाई कर लेना पर्याप्त है। अगर तेल मालिश करते हों तो एक छोटी तौलिया अलग से रखें। स्नान के बाद इसी सूखी तौलिया से शरीर को रगड़-रगड़कर पांछ लें, तो आपकी त्वचा स्निग्ध और स्वस्थ तो बनेगी ही और साबुन की ज़रूरत भी नहीं पड़ेगी। इसके अलावा सुविधा हो तो बेसन, मुलतानी मिट्टी और कई तरह के उबटन बेहतर विकल्प हैं। इनकी विधियाँ इसी पुस्तक के 'त्वचा प्रकरण' और 'स्वदेशी चिकित्सा' नामक पुस्तक में वर्णित हैं। आगे के पृष्ठों पर वर्णित दूध से दाढ़ी बनाने और नहाने का नुस्खा भी आजमा सकते हैं। अब यदि इतने पर भी साबुन को अलविदा कह पाना मुश्किल ही लग रहा हो तो नीम, रीठा, शिकाकाई आदि जड़ी-बूटियों के योग से बने कुछ अच्छे किस्म के साबुन यदा-कदा इस्तेमाल किए जा सकते हैं। बच्चों के लिए साबुन के बजाय स्नान कराने से पहले उबटन लगाना सबसे अच्छा उपाय है।

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