सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
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टूथब्रशः स्वास्थ्य का साधन या रोगाणुओं की सराय
हमेशा स्वास्थ्यप्रद आहार-विहार का पालन करने वाले भी अगर अचानक बीमार पड़ जाएं उनकी बीमारी रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले उन्हीं के टूथब्रश से उपहार में मिल गई हो। जी हाँ, दाँतों, मसूड़ों को स्वस्थ, सुंदर रखने की मंशा से अपनाया जाने वाला स्वास्थ्य का यह साधन कभी भी बीमारियों की सौगात ला सकता है।
यह ताज्जुब की बात जरूर लग सकती है, पर है एकदम सच। और, यह आश्चर्यजनक खोज की है स्वानंद अनुसंधान पीठम, पुणे के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की एक टीम ने। आजादी बचाओ आन्दोलन के यवतमाल (महाराष्ट्र) जिले के वरिष्ठ कार्यकर्ता जितेन्द्र लोड्या और उनके चिकित्सा विशेषज्ञ साथियों की टीम फिलहाल टूथब्रश के नुकसानदेह पहलुओं को काफी गम्भीरता से आमजन के बीच उजागर करने में लग गए हैं। शुरुआती दौर में ही टूथब्रश में पनपने वाली कई बीमारियों के जीवाणु ढूँढ़ निकाले गये हैं। इनमें हैजा जैसे संक्रामक रोगों तक के भी जीवाणु शामिल हैं। सेहत बरकरार रखने के नाम पर पूरी दुनिया में इस्तेमाल हो रहे टूथब्रश के कई दूसरे नुकसान तो खेर पूरी रिपोर्ट आ जाने के बाद ही पता चलेंगे, पर शुरुआती सूचनाओं से ही ख़तरे का संकेत तो मिल ही जाता है।
टूथब्रश और टूथपेस्ट जैसी चीजों के परीक्षण में लगे चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार मुँह से निकली गन्दगी की एक परत दरअसल टूथब्रश में नीचे की ओर ब्रश की जड़ों में धुलने के बाद भी अक्सर जमी ही रहती है। अब ऐसा तो होता नहीं कि ब्रश करने के बाद आप पानी गरम करें
टूथब्रश अच्छी तरह धुलकर रखें। यूँ गरम पानी से भी कोई गारण्टी नहीं है कि ब्रश की जड़ें ठीक से धुल ही जाएँ। वैसे भी काफी साफ़-सुथरी चिकनी चीजों को लगातार पानी से साफ़ करते रहने पर भी हफ़्ते दो हफ़्ते में जब साबुन वगैरह से अच्छी तरह रगड़ने की जरूरत महसूस होने लगती है, तो फिर साल-छः महीने लगातार इस्तेमाल होने वाले टूथब्रश को साफ़ रख पाना कितना कठिन होगा, यह समझा जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रश की जड़ों में जमी गन्दगी तरह-तरह की बीमारियों के जीवाणुओं के पनपने का अच्छा साधन है। इसके अलावा टूथब्रश सामान्यतः बाथरूम में लगे किसी स्टैंपड पर ही रखे जाते हैं। आधुनिकता के चलते लैट्रिन और बाथरूम अक्सर एक साथ जुड़े तो रहते ही हैं। ऐसे में पूरे घर में तरह-तरह के रोगाणुओं की संभावना वाली एकमात्र यही जगह है। स्पष्टतः यहाँ रखे टूथब्रश में जमे अन्न-कण रोगाणुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बड़ी आसानी से बन ही जाते हैं और इस तरह इनका हमारे शरीर में पहुँचना एकदम आसान हो जाता है। कहने का अर्थ यह है कि तमाम तकनीकी बाजीगरी दिखाने के बावजूद भाँति-भाँति के टूथब्रश अंततः निरापद नहीं ही हैं।
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