सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
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शीतल पेय भी हैं सौन्दर्य के शत्रु
‘लाइफ स्टेटस’ का प्रतीक बन चुके कोका-पेप्सी जैसे शीतल पेय स्वास्थ्य और सौन्दर्य की दृष्टि से धीमे जहर ही हैं। शीतल पेय ज्यादा पीने से होठों व त्वचा का रूखापन तो बढ़ता ही है, बुढ़ापे का आक्रमण भी जल्दी होता है। पर इस जमाने की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि लोग बेवकूफ़ियाँ करते जाते हैं और तब तक नहीं चेतते जब तक कि पानी नाक से ऊपर नहीं पहुँच जाता। मैक्सिको में पानी सचमुच लोगों की नाक तक पहुँच आया है तो अब वे चेतने और चेताने का जोर-शोर से अभियान शुरू कर रहे हैं। यह अभियान पेप्सी, कोका जैसे विभिन्न ब्रांड के शीतल पेयों के ही खिलाफ़ है। मैक्सिकोवासी और मामलों में भले ही फ़िसड़ि हों, पर पेप्सी और कोकाकोला जैसे पेय गटकने की बहादुरी में दुनिया भर में अव्वल नम्बर पर रहे हैं। मैक्सिको का आम आदमी साल भर में औसतन 160 लीटर शीतल पेय उदरस्थ कर जाता है। यानि मैक्सिको के लोग नशे की हद तक शीतल पेयों की गिरफ़्त में हैं। नतीजा यह है कि वहाँ के लोगों की खान-पान की आदतें गड़बड़ा गई हैं और काफी लोगों को शीतल पेयों के साइड-इफ़ेक्ट्स झेलने पड़ रहे हैं।
पिछले एक साल पूर्व हालात बिगड़ते दिखे तो मैक्सिको के डॉक्टरों और उपभोक्ता मामलों में नज़र रखने वाली संस्था ने मिलकर शीतल पेयों के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर व्यापक अध्ययन और परीक्षण करके एक चौकाने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत की है। रिपोर्ट में आश्चर्यजनक रूप से कुछ वैसी ही बातें उभरकर आई हैं जैसी कि भारत में बहुराष्ट्रीय गुलामी के खिलाफ़ संघर्ष कर रहा आज़ादी बचाओ आंदोलन लंबे अरसे से करता रहा है। मैक्सिको के डॉक्टरों की रिपोर्ट इतनी प्रभावी और प्रामाणिक है कि पेप्सी और कोक जैसी कंपनियों की बोलती बंद है और वे कोई भी सफ़ाई देने से कतरा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शीतल पेय ज्यादा पीने से डि-कैल्सीफ़िकेशन जैसी ख़तरनाक बीमारी हो सकती है। सिरदर्द, गैस्ट्रिक अल्सर व चिंता जैसी बीमारियों का ख़तरा तो बना ही रहता है। मैक्सिकन एसोसिएशन ऑफ़ स्टडीज फ़ॉर कंज्यूमर डिफ़ेन्स और चिकित्सकों के स्वास्थ्य अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार इन शीतल पेयों में प्रोटीन,
की मात्रा शून्य होती है। इसलिए इन्हें लेने से भूख घट जाती है और कुपोषण हो सकता है। स्वास्थ्य अध्ययन की विभिन्न रिपोर्टों से यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि कोला पेय से बनाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। कैफीन, फ़ॉस्फ़ेट जैसी चीजों की मौजूदगी से दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर असामान्य तो होते ही हैं, रिफ़ाइण्ड शर्करा और फ़्रक्टोज़ जब फ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल के साथ मिलते हैं तो फ़ॉस्फ़ोरस और कैल्सियम का संतुलन भी बिगड़ जाता है। नतीजतन बच्चों, किशोरों और महिलाओं को विशेष रूप से हड्डी संबंधी तकलीफ़ों से गुज़रना पड़ सकता है। डॉक्टरों ने चौकाने वाली एक नई जानकारी यह दी है कि
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